रोग व लक्षण अनुसार घरेलू उपचार
10 शारीरिक संस्थानों के 156 रोगों के लिए 2,544 शास्त्रीय व प्रामाणिक घरेलू उपचार। दादी माँ के नुस्खे, काढ़ा, चूर्ण, लेप व क्षीरपाक।
12 नुस्खा टूल्स देखेंरोगानुसार नुस्खे
सभी रोग व स्थितियां (156)
पेट का तेज दर्द व मरोड़ (उदरशूल)
रुकी हुई वात के कारण आंतों में तीव्र संकोच व असहनीय पेट दर्द।
अम्लपित्त, एसिडिटी व सीने में जलन
आमाशय में अतिरिक्त पित्त व अम्ल का संचय, जिससे सीने में जलन व खट्टी डकारें आती हैं।
कील-मुंहासे, युवानपिड़का व फुंसियां
रक्त व पित्त के दूषित होने से चेहरे की तैलीय ग्रंथियों में मवाद व फुंसियां बनना।
दस्त, अतिसार व लूज मोशन
आंतों में जल धातु की अधिकता व अग्निमांद्य से बार-बार पानी जैसे दस्त होना।
दांत में तेज दर्द, कीड़ा लगना व दंतशूल
दांतों में कृमि (बैक्टीरिया) द्वारा कैविटी बनाना व वात के प्रकोप से तीव्र पीड़ा होना।
किशोरों का बिस्तर गीला करना (शय्यामूत्र)
गहरी तंद्रा व अपान वायु की निर्बलता से सोते समय पेशाब का छूट जाना।
छींकों की एलर्जी व नजला
धूल, परागकण या ठंडी हवा से नासा मार्ग की अतिसंवेदनशीलता व लगातार छींकें।
सीने में भारीपन, खिंचाव व हृच्छूल की पूर्व चेतावनी
हृदय की धमनियों में पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचने से सीने में भारी दबाव व दर्द (हृच्छूल)।
धमनियों में रुकावट, ब्लॉक व हृदय की सफाई
हृदय की धमनियों में कफ व चर्बी के जमाव से रक्त प्रवाह में अवरोध पैदा होना।
फेशियल पाल्सी, मुंह का लकवा (अर्दित)
चेहरे की नसों में तीव्र वात प्रकोप से मुंह का एक तरफ मुड़ जाना व पलक न झपकना।
मूत्राशय में मरोड़, खिंचाव व पेड़ू का दर्द
अपान वात के प्रकोप से मूत्राशय की दीवारों में अचानक तीव्र संकोच व मरोड़ होना।
मसूढ़ों से खून आना, सूजन व शीताद रोग
कफ व रक्त के दूषित होने से मसूढ़ों का स्पंज की तरह फूलना व आसानी से खून बहना।
नाक बंद होना, नासा अवरोध व मांस बढ़ना
नासा गुहा में कफ जमने व मांस बढ़ने से श्वास मार्ग का अवरुद्ध हो जाना।
रक्त विकार, अशुद्ध खून व रक्तशोधन की आवश्यकता
रक्त में पित्त व विषैले तत्वों के मिल जाने से शरीर पर फोड़े, दाद व चर्म विकारों का होना।
रक्त का गाढ़ापन व थक्के बनने की प्रवृत्ति
कफ व आमदोष के कारण रक्त का गाढ़ा होना जिससे धमनियों में थक्के बनने का खतरा रहता है।
भीतरी चोट, गुम चोट व रक्त का जमना
बाहरी आघात से त्वचा के भीतर रक्त वाहिकाओं का फटना व रक्त जमने से दर्द होना।
फोड़े-फुंसी, बालतोड़ व विद्रधि
बाल टूटने या रक्त दूषित होने से त्वचा के भीतर मवाद से भरी दर्दनाक गांठ बनना।
दमा, अस्थमा व श्वास फूलना
कफ द्वारा प्राण वायु का मार्ग रुकने से सांस लेने में तीव्र कष्ट व घरघराहट होना।
पेशाब में जलन, मूत्रकृच्छ्र व पीला पेशाब
पित्त के तीखेपन से मूत्रनली में जलन होना व कष्टपूर्वक मूत्र का निकलना।
हृदय की कमजोरी, निर्बलता व हृद्दौर्बल्य
हृदय की मांसपेशियों का कमजोर होना जिसे अर्जुन व हृद्य औषधियों द्वारा बल दिया जाता है।
गर्दन का दर्द, सर्वाइकल व ग्रीवास्तम्भ
गर्दन के मनकों में घिसाव व नसों के दबने से गर्दन, कंधों व हाथों में दर्द व सुन्नपन।
सीने में कफ का जमाव व जकड़न
अवलंबक कफ की अधिकता से सीने में गाढ़ा बलगम जमना व श्वास में बाधा।
छोटे बच्चों का बिस्तर गीला करना (बाल शय्यामूत्र)
मूत्राशय की पेशियों की अपरिपक्वता व गहरी नींद के कारण बच्चों का बिस्तर गीला करना।
बच्चों की सर्दी-खांसी, जुकाम व सीने की घरघराहट
बाल्यावस्था स्वाभाविक रूप से कफ प्रधान होने के कारण बच्चों में जल्दी-जल्दी सर्दी-जुकाम होना।
बच्चों का सूखा रोग, दुर्बलता व देर से चलना (फक्क रोग)
पोषण की कमी से बच्चों की हड्डियों का कमजोर होना व सूखा रोग होना।
बच्चों के पेट में कीड़े व सोते में दांत पीसना
मीठा व मिट्टी खाने से बच्चों के पेट में चुनचुने कीड़े पड़ना जिससे वे रात को दांत पीसते हैं।
मुंह की दुर्गंध, सांसों की बदबू (मुख दुर्गंध)
आमाशय के कच्चे आमदोष व जीभ पर जमे मैल से सांसों में दुर्गंध पैदा होना।
खट्टी व तीखी डकारें
आमाशय में भोजन के सड़ने से खट्टी व दुर्गंधयुक्त डकारों का बार-बार उठना।
फेफड़ों की पुरानी सूजन व जीर्ण कास
श्वास नलिकाओं की पुरानी सूजन जिससे फेफड़े कमजोर होते हैं व बलगम बनता है।
कब्ज (कोष्ठबद्धता) व मल की कठोरता
अपान वायु के कुपित होने से आंतों में रूखापन व मल का रुकना।
सदा थकान रहना, ऊर्जा की कमी व दौर्बल्य
रस धातु व ओज के क्षीण होने से शरीर की समस्त ऊर्जा व कार्यक्षमता का समाप्त होना।
अनिद्रा, नींद न आना व बेचैनी
वात व पित्त की अधिकता से मस्तिष्क में तर्पक कफ का कम होना व गहरी नींद न आना।
पुराना धीमा बुखार, हड्डियों की हरारत (जीर्ण ज्वर)
अस्थि व मज्जा धातु में छिपे पुराने बुखार के विष जिससे सदा हरारत व कमजोरी रहती है।
सर्दी-जुकाम, नजला व बहती नाक
कफ व वात के कुपित होने से नासा मार्ग में कफ का बढ़ना व नाक बहना।
फटी एड़ियां, बिवाई व तलवों की दरारें
वात के रूखेपन के कारण एड़ियों की त्वचा का फटना व बिवाइयां होना।
रूसी, डैंड्रफ व सिर की खुजली (दारुणक)
वात के रूखेपन व कफ के मेल से सिर की त्वचा पर पपड़ीदार रूसी व खुजली होना।
आंखों के नीचे काले घेरे व सूजन (डार्क सर्कल)
अनिद्रा, मानसिक तनाव व स्क्रीन देखने से आंखों के आसपास की नसों का काला दिखना।
उदासीनता, अवसाद व मन का बुझना (विषाद)
मन में तमोगुण की वृद्धि से सत्व गुण का क्षीण होना व जीवन में उत्साह का समाप्त हो जाना।
डायबिटीज में पैरों की जलन, सुन्नपन व तलवों में आग
रक्त में अधिक शुगर रहने से पैरों की नसों का जलना व तलवों में असहनीय जलन होना।
फटे होंठ, पपड़ी जमना व होंठों से खून आना
होंठों में तैलीय ग्रंथियां न होने से वात द्वारा होंठों का सूखना व फटना।
सूखी खांसी व गले में कांटे जैसी चुभन
श्वास मार्ग में रूखापन आने से बिना कफ वाली लगातार चलने वाली सूखी खांसी।
मुंह सूखना, लार की कमी व मुखशोष
वात के रूखेपन व पित्त की गर्मी से मुंह में लार ग्रंथियों का सूख जाना।
पेचिश, आंव व मरोड़ (प्रवाहिका)
आंतों में आम व कफ के संचय से मरोड़ के साथ चिपचिपा आंव युक्त मल आना।
कान बहना, कान से पीब व मवाद (कर्णस्राव)
कान के भीतर कफ व पित्त के प्रदाह से कान का बहना व मवाद निकलना।
कान का दर्द, टीस मारना व कर्णशूल
ठंडी हवा लगने या मैल जमने से कान के पर्दे में वात का अवरोध व तीव्र कर्णशूल।
एक्जिमा, छाजन व विचर्चिका
कफ व पित्त के रक्त में मिलने से त्वचा पर छाजन (एक्जिमा) होना व चिपचिपे स्राव का बहना।
यूरिया, क्रिएटिनिन बढ़ना व गुर्दे की सफाई
गुर्दे द्वारा रक्त की सफाई मंद होने से यूरिया व क्रिएटिनिन का रक्त में बढ़ना।
बालों का झड़ना (खालित्य) व बालों का पतलापन
पित्त की अतिरिक्त गर्मी द्वारा बालों की जड़ों को सुखा देना जिससे बाल झड़ने लगते हैं।
अत्यधिक पसीना व पसीने की दुर्गंध
शरीर में अत्यधिक पित्त व गर्मी से पसीने की दुर्गंध व अधिक मात्रा में स्राव।
आंखों में जलन, लाली, थकान व कमजोरी
आलोचक पित्त के असंतुलन व कंप्यूटर-फोन देखने से आंखों में रूखापन, जलन व थकान।
चेहरे की झाइयां, काले धब्बे व मेलास्मा
भ्राजक पित्त के कुपित होने से त्वचा पर मेलेनिन का अधिक संचय व झाइयां बनना।
चेहरे की झुर्रियां, महीन रेखाएं व ढीली त्वचा
रस व मांस धातु के क्षीण होने से त्वचा का लचीलापन घटना व झुर्रियां पड़ना।
फैटी लिवर व यकृत की सूजन
लिवर कोशिकाओं में चर्बी जमने से यकृत का कार्य मंद पड़ना।
विषाक्त भोजन व आमविष
दूषित या विरुद्ध भोजन के सेवन से उत्पन्न तीव्र विषाक्तता व उल्टी-दस्त।
बार-बार पेशाब आना, बहुमूत्रता व रात में पेशाब
कफ व वात की शिथिलता से मूत्राशय की धारण शक्ति कमजोर होना व बार-बार पेशाब आना।
पेशाब में झाग आना व प्रोटीन निकलना
गुर्दे की छानने वाली जाली कमजोर होने से रक्त के पोषक प्रोटीन का पेशाब में बहना।
कंधे की जकड़न व जाम होना (अपबाहुक)
कंधे के जोड़ में वात द्वारा चिकनाई सूखने से हाथ की गति का रुक जाना।
दाद, खाज व कवक संक्रमण (दद्रु)
कफ व पित्त की विकृति से जांघों या त्वचा पर गोल छल्लेदार दाद व असहनीय खुजली।
पेट में गैस, अफारा व पेट फूलना
मंदाग्नि के कारण उदर में अपान वायु का रुकना व पेट में गैस का बनना।
वात-रक्त, यूरिक एसिड व पैर के अंगूठे का दर्द
रक्त में यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों (विशेषकर अंगूठे) में तीखे क्रिस्टल्स का जमना।
पेट का भारीपन व आंतों की सुस्ती
आंतों में आमदोष व भारीपन का संचय जिससे शरीर में भारीपन व थकान रहती है।
घाव के पुराने निशान, दाग व स्कार्स
घाव भरने के बाद छूटे जिद्दी निशान जिन्हें वर्ण्य औषधियों द्वारा सामान्य रंग में लाया जाता है।
दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट व हृद्द्रव
प्राण व व्यान वायु के कुपित होने से हृदय की धड़कन का अनियंत्रित व तेज हो जाना।
लू लगना, अत्यधिक गर्मी व शरीर में पानी की कमी
गर्मियों में लू के तीखे प्रभाव से शरीर का पानी सूखना, पित्त कुपित होना व बेहोशी आना।
रक्तप्रदर, अत्यधिक मासिक स्राव व कमजोरी
पित्त के तीखेपन से रक्त का पतला होकर अत्यधिक मात्रा में बहना (रक्तप्रदर)।
एड़ी का दर्द, वातकंटक व एड़ी की हड्डी बढ़ना
एड़ी की हड्डी व स्नायु में वात का संचय होने से कांटे जैसी चुभन होना।
हिचकी (हिक्का रोग)
प्राण व उदान वायु के अवरोध से डायाफ्राम का अचानक संकुचित होना।
उच्च रक्तचाप, हाई बीपी व धमनियों का तनाव
रक्त वाहिकाओं में वात के रूखेपन व पित्त की तेजी से रक्त का अत्यधिक दबाव बढ़ना।
उच्च कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स व रक्त में चर्बी
कफ व मेद धातु की विकृति से रक्त वाहिकाओं में चिपचिपी चर्बी (कोलेस्ट्रॉल) का जमना।
गला बैठना, स्वरभेद व आवाज का रुकना
स्वरयंत्र (वोकल कॉर्ड्स) की सूजन या जोर से चिल्लाने से आवाज का बैठ जाना।
थायराइड (हाइपोथायरायडिज्म), वजन बढ़ना व गलगंड
थायराइड ग्रंथि के धीमे पड़ने से चयापचय (मेटाबॉलिज्म) का मंद होना व चर्बी का संचय।
अपच, अजीर्ण व बदहजमी
जठराग्नि की कमजोरी से भोजन का सम्यक पाचन न होना व आमदोष (टॉक्सिन्स) की उत्पत्ति।
शिशुओं के पेट में गैस, मरोड़ व रोना (शिशु उदरशूल)
छोटे बच्चों के नाजुक पेट में दूध पीने के बाद गैस अटकना व तेज मरोड़ होना।
डायपर रैश, शिशु की त्वचा छिलना व लाली
गीलेपन व मूत्र के तीखेपन से शिशु के कूल्हों की नाजुक त्वचा का छिलना (अहिपूतना)।
बच्चों के दांत निकलते समय कष्ट, दस्त व लार टपकना
मसूढ़ों को चीरकर दांत बाहर आते समय पित्त की गर्मी से बच्चों को दस्त व बुखार होना।
पेट के कीड़े (कृमि रोग)
आंतों में कफ व मीठे खाद्य पदार्थों के संचय से उत्पन्न परजीवी कृमि।
अनियमित मासिक, माहवारी का रुकना या देरी से आना
कफ व वात के कारण गर्भाशय स्रोतों का रुकना व आर्तव का खुलकर न आना।
संग्रहणी (आईबीएस) व आंतों की कमजोरी
ग्रहणी कला की दुर्बलता जिससे भोजन पचे बिना ही शरीर से बाहर निकल जाता है।
पीलिया (जॉन्डिस) व यकृत विकार
पित्त के रक्त में मिल जाने से त्वचा, आंखें व मूत्र पीले हो जाते हैं व यकृत कमजोर होता है।
गुर्दे की पथरी, अश्मरी व पेशाब में रुकावट
कफ व वात के संयोग से मूत्र संस्थान में पथरी का बनना व मूत्र मार्ग में रुकावट।
घुटनों का दर्द, संधिवात व जोड़ों में घिसाव
जोड़ों के बीच ग्रीस (श्लेषक कफ) सूखने से हड्डियों का आपस में टकराना व दर्द।
भूख न लगना (अरुचि व मंदाग्नि)
जठराग्नि के मंद होने से भोजन में अरुचि होना व भूख का समाप्त हो जाना।
स्वाद न आना, जीभ का स्वादहीन होना (अरसज्ञता)
बोधक कफ के दूषित होने से स्वाद ग्रंथियों का काम न करना व खाने का कोई स्वाद न मिलना।
निम्न रक्तचाप, लो बीपी व कमजोरी
रस धातु व ओज की कमी से रक्त संचार का मंद होना व शरीर में निर्बलता।
स्तनपान में दूध की कमी (स्तन्य क्षय)
प्रसवोपरांत रस धातु की कमजोरी से स्तनों में दूध का कम बनना जिसे शतावरी व जीरे से बढ़ाया जाता है।
शुक्राणु की कमी, वीर्य का पतलापन व वीर्य दोष
अत्यधिक पित्त की गर्मी से शुक्र की गुणवत्ता घटना व शुक्राणुओं की संख्या कम होना।
कमर दर्द, कटिशूल व पीठ में जकड़न
लंबर रीढ़ की मांसपेशियों में तनाव या डिस्क के खिसकने से कमर में तेज दर्द।
पुरुष दुर्बलता, पौरुष शक्ति की कमी व शीघ्रपतन
शुक्र धातु व वात की निर्बलता से पौरुष में कमी जिसे वाजीकरण औषधियों द्वारा पुष्ट किया जाता है।
रजोनिवृत्ति, अचानक गर्मी लगना (हॉट फ्लैशेज) व चिड़चिड़ापन
मासिक धर्म बंद होने की उम्र में पित्त व वात के बढ़ने से अचानक पसीना व गर्मी लगना।
मासिक धर्म में तेज दर्द, कष्टार्तव व पेट की ऐंठन
अपान वायु के उलटे प्रवाह से गर्भाशय की मांसपेशियों में तेज ऐंठन व कष्टार्तव।
दिमागी कमजोरी, मानसिक थकान व सिर भारी
अत्यधिक दिमागी परिश्रम व नींद की कमी से मस्तिष्क का थकना व कमजोर होना।
मानसिक तनाव, घबराहट व चिंता (चित्तोद्वेग)
मन के रजोगुण व प्राण वायु के अस्थिर होने से हृदय व मस्तिष्क में भय व बेचैनी।
मेटाबॉलिक सिंड्रोम व संपूर्ण चयापचय विकार
शरीर के सभी चयापचय तंत्रों का एक साथ बिगड़ना व समग्र स्वास्थ्य पर संकट।
माइग्रेन, आधासीसी का दर्द व सूर्योदय सिरदर्द
वात व पित्त के प्रकोप से मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं का फैलना व आधे सिर में तीव्र असहनीय पीड़ा।
सुबह शरीर में टूटन, भारीपन व जकड़न
रातभर आंतों में आमदोष बनने से सुबह उठते ही संपूर्ण शरीर में टूटन व भारीपन।
मुंह के छाले, जीभ कटना व मुखपाक
पेट की गर्मी व पित्त के बढ़ने से मुख की त्वचा का छिलना व दर्दनाक छाले होना।
मांसपेशियों में खिंचाव, मोच व पिंडलियों की ऐंठन
स्नायुओं (लिगामेंट्स) में खिंचाव आने से सूजन व मांसपेशियों में असहनीय मरोड़।
सिर व चेहरे की नसों में फड़कन व ऐंठन
तनाव व वात के कारण मुख व नेत्र की मांसपेशियों में अनियंत्रित फड़कन होना।
हाथ-पैरों का कांपना, कंपकंपी व वेपथु
मस्तिष्क की नाड़ियों में वात के सूख जाने से मांसपेशियों का अनियंत्रित कांपना।
डरावने सपने, सोते में चौंकना व बेचैन नींद
साधक पित्त व वात की उत्तेजना से अवचेतन मन में भयभीत करने वाले स्वप्न आना।
रात में उठने वाली खांसी व दम घुटना
लेटने पर नाक का कफ गले में गिरने व ठंडी हवा से रात को उठने वाली कष्टदायक खांसी।
स्वप्नदोष, धातु गिरना व अनैच्छिक वीर्यपात
मानसिक उत्तेजना व वात के कुपित होने से सोते समय अनैच्छिक शुक्रपात होना।
नाक से खून बहना, नकसीर फूटना (ऊर्ध्वग रक्तपित्त)
गर्मी या तीखे पदार्थों से पित्त कुपित होकर रक्त के साथ नाक की पतली नसों को फाड़कर बहना।
मोटापा, पेट की चर्बी व स्थौल्य रोग
कफ व मेद धातु के अनियंत्रित संचय से शरीर का बेडौल व स्थूल हो जाना।
हड्डियों की कमजोरी, ऑस्टियोपोरोसिस व कैल्शियम की कमी
शरीर में कैल्शियम व अस्थि धातु के क्षीण होने से हड्डियों का कमजोर व छिद्रयुक्त होना।
अति-चिंतन, विचारों की आंधी व मानसिक अशांति
प्राण वायु की चंचलता से मन में बिना रुके अनियंत्रित विचारों का घूमते रहना।
इंद्रलुप्त, उड़नछू गंजापन व बालों का उड़ना
रोमकूपों में कफ व रक्त का अवरोध होने से अचानक किसी स्थान के बालों का पूरी तरह उड़ जाना।
पीसीओडी (PCOS), ओवरी में गांठें व हार्मोनल असंतुलन
कफ व चर्बी के आवरण से डिम्ब (अंडे) का न बनना व ओवरी में सिस्ट बनना।
पेट व आंतों के छाले (पेप्टिक अल्सर)
आमाशय व आंतों की अंदरूनी परत में तीखे पित्त व अम्ल द्वारा घाव (अल्सर) बन जाना।
हाथ-पैरों का सुन्न होना, झनझनाहट व सुप्ति
स्नायुओं में रक्त व वात के अवरोध से हाथ-पैरों की उंगलियों में झनझनाहट व सुन्नपन।
बवासीर (अर्श), मस्से व गुदा चीरा
पुरानी कब्ज व अत्यधिक जोर लगाने से गुदा की नसों का फूलना व मस्से बनना।
कमजोर याददाश्त, विस्मृति व भूलने की बीमारी
मज्जा धातु व मेधा शक्ति के क्षीण होने से स्मरण शक्ति व एकाग्रता का घट जाना।
खराब रक्त संचार, हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे रहना
व्यान वायु के मंद होने से शरीर के छोरों (हाथ-पैरों) तक पर्याप्त रक्त व गर्मी न पहुंचना।
बीमारी के बाद की कमजोरी व स्वास्थ्य लाभ
दीर्घ रोग के पश्चात शरीर की समस्त धातुओं का क्षीण होना जिन्हें रसायन आहार से पुष्ट किया जाता है।
संक्रमण उपरांत दिल की कमजोरी व थकावट
गंभीर ज्वर या संक्रमण के बाद हृदय का थक जाना जिसे रसायन चिकित्सा से पोषण दिया जाता है।
प्रसवोपरांत देखभाल, सूतिका परिचर्या व शरीर की मजबूती
प्रसव के बाद खाली हुए उदर व गर्भाशय में वात शांति व बलवर्धन के लिए पौष्टिक योग।
प्री-डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस व बॉर्डरलाइन शुगर
कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन को न पहचानना जिससे भोजन के बाद रक्त शर्करा तेजी से उछलती है।
बालों का असमय सफेद होना (पालित्य)
क्रोध, तनाव व पित्त वर्धक खान-पान से बालों की जड़ों में मेलेनिन का क्षय व बाल सफेद होना।
घमौरियां व गर्मियों की चुभने वाली फुंसियां
गर्मियों में पसीने की नलियों के बंद होने से त्वचा पर चुभने वाली नन्हीं फुंसियां।
सोरायसिस, किटीभ कुष्ठ व चांदी जैसी पपड़ी
वात व कफ के प्रकोप से त्वचा का मछली के शल्क जैसा सूखा, खुरदरा व पपड़ीदार हो जाना।
पायरिया, मसूढ़ों से मवाद व दांतों का हिलना
मसूढ़ों की जड़ों में मवाद (पूय) पड़ने से दांतों की पकड़ कमजोर होना व दांत हिलना।
गुर्दों के हिस्से में मीठा दर्द व पीठ में खिंचाव
गुर्दे के चारों ओर तनाव व अपान वात के अवरोध से पीठ के दोनों तरफ गहरा दर्द।
पिंडलियों में मीठा दर्द व पैरों की बेचैनी
अपान वात के प्रकोप से रात को पिंडलियों में दर्द व पैरों में लगातार बेचैनी रहना।
आमवात (गठिया बाई) व जोड़ों की सूजन
कच्चे आमदोष (टॉक्सिन्स) का जोड़ों में जाकर वात के साथ मिलकर भयंकर शोथ पैदा करना।
पेशाब खुलकर न आना, अल्पमूत्रता व रुकावट
अपान वायु के रुकने से मूत्राशय में मूत्र का अवरुद्ध होना व बूंद-बूंद टपकना।
साइटिका, गृध्रसी व रंगा का दर्द
गृध्रसी नाड़ी (साइटिक नर्व) पर दबाव पड़ने से कूल्हे से एड़ी तक खिंचाव व असहनीय दर्द।
मौसमी फ्लू, वायरल बुखार व बदन दर्द
मौसम बदलने पर वायरल संक्रमण से तेज बुखार, कंपकंपी व सारे शरीर में टूटन।
हल्की मेहनत पर सांस फूलना (श्वास कष्ट)
शारीरिक कमजोरी या मोटापे के कारण सामान्य परिश्रम में भी सांस का उखड़ना।
साइनस, पीनस रोग व माथे का भारीपन
माथे व चेहरे के साइनस कोटरों में कफ जमने से तेज सिरदर्द व नाक का अवरोध।
धूम्रपान जनित खांसी व प्रदूषण से फेफड़े की सफाई
धूम्रपान या वायु प्रदूषण के विषैले कणों से फेफड़ों का अस्वस्थ होना व पुरानी खांसी।
गले की खराश, दर्द व छिला हुआ गला
कंठ की अंदरूनी परत में सूजन व जलन जिससे निगलने में तीव्र कष्ट होता है।
कुक्कुर खांसी व लगातार धौंकनी जैसी खांसी
वायु के तीव्र अवरोध से कुत्तों की आवाज जैसी लगातार चलने वाली आक्रामक खांसी।
रीढ़ की हड्डी की अकड़न व बांस जैसा सीधापन
रीढ़ के जोड़ों में प्रदाह से मनकों का आपस में जुड़ना व शरीर का अकड़ जाना।
प्लीहा वृद्धि व तिल्ली बढ़ना
पुराने मलेरिया या यकृत विकार के कारण प्लीहा (तिल्ली) का आकार बढ़ जाना।
स्ट्रेच मार्क्स, किक्किस व खिंचाव के निशान
गर्भावस्था या तेजी से वजन घटने-बढ़ने से पेट की त्वचा के रेशे फटने से बनी धारियां।
धूप से सांवलापन, टैनिंग व चेहरे का निस्तेज होना
सूर्य के तीखे ताप से भ्राजक पित्त का कुपित होना व चेहरे का रंग काला पड़ना।
जोड़ों की ग्रीस सूखना व हड्डियों की रगड़
संधियों में श्लेषक कफ सूखने से उपास्थियों का घिसना व गंभीर पीड़ा।
कंडरा शोथ, टेनिस एल्बो व कलाई का दर्द
लगातार एक ही काम करने से कण्डरा (टेंडन) में सूजन व दर्द होना।
तनाव जनित सिरदर्द व सिर का भारीपन
मानसिक थकान, तनाव व प्राण वायु के कुपित होने से सिर व माथे में कसावयुक्त दर्द।
कान में सांय-सांय, सीटी की आवाज (कर्णनाद)
श्रवण नाड़ी (ऑडिटरी नर्व) में वात के रूखेपन से बिना बाहरी आवाज के कान में सीटी बजना।
टॉन्सिल्स की सूजन व दर्द (गलगंडिका)
कंठ के दोनों ओर स्थित ग्रंथियों (टॉन्सिल्स) में संक्रमण से सूजन व दर्द।
दांतों में झनझनाहट, ठंडा-गरम लगना (दंतहर्ष)
दांतों का इनेमल घिसने से वात द्वारा नसों में ठंडा-गरम लगने से तेज झनझनाहट।
मधुमेह (डायबिटीज), शुगर व प्रमेह रोग
मेद धातु की विकृति व अग्न्याशय की कमजोरी से रक्त में शर्करा (शुगर) का अनियंत्रित बढ़ना।
अकारण वजन गिरना, अत्यधिक दुबलापन (कार्श्य)
वात के रूखेपन से मांस व मेद धातु का सूखना व शरीर का अत्यधिक दुर्बल होना।
मूत्रनली में खुजली, चुभन व बेचैनी
मूत्र में लवणों की अधिकता या फंगस के कारण मूत्रनली के भीतर खुजली व जलन।
पेशाब न रुकना, छींकने पर पेशाब निकलना
पेल्विक मांसपेशियों व मूत्राशय के वाल्व की कमजोरी से पेशाब पर नियंत्रण खोना।
मूत्र मार्ग संक्रमण (यूटीआई) व मूत्राशय की सूजन
मूत्राशय में संक्रमण व सूजन होने से बार-बार व कष्ट से पेशाब आना।
शीतपित्त, पित्ती उछलना व एलर्जी चकत्ते
ठंडी हवा लगने या पित्त प्रकोपक आहार से शरीर पर बड़े-बड़े लाल चकत्ते (पित्ती) उभरना।
वेरिकोज वेन्स, नीली नसों का फूलना व शिराग्रंथि
पैरों की नसों के वाल्व कमजोर होने से अशुद्ध रक्त का ठहरना व नसों का गुच्छेदार फूलना।
सिर चकराना, चक्कर आना व भ्रम रोग
पित्त की गर्मी व वात के असंतुलन से मस्तिष्क में रक्त संचार गड़बड़ाना व चक्कर आना।
उल्टी, जी मिचलाना व वमन
उदान वायु के विपरीत प्रवाह से आमाशय का भोजन मुख मार्ग से बाहर फेंकना।
शरीर में पानी भरना, पैरों की सूजन (शोथ रोग)
कफ व वात की विकृति से रस व जल धातु का त्वचा के नीचे ठहरना व सूजन पैदा करना।
आंखों से पानी बहना व आंखों की खुजली
कफ व पित्त के मेल से आंखों में खुजली व लगातार पानी बहना।
कफ वाली खांसी व सीने में जमा बलगम
फेफड़ों में गाढ़े कफ का जमाव जिससे खांसने पर बार-बार बलगम निकलता है।
श्वेतप्रदर, सफेद पानी जाना व कमर का कटना
कफ के संचय से योनि मार्ग से लगातार सफेद पानी जाना व शरीर का खोखला होना।
दांतों का पीलापन, मैल व तंबाकू-गुटखा के दाग
दांतों पर मैल व टार्टर की सख्त परत जमना जिसे प्राकृतिक मंजन द्वारा साफ किया जाता है।
