🧪 यकृत, पित्ताशय व चयापचय
यकृत / प्लीहा / क्लोम (Yakrit & Pleeha)
⚡ दोष: रंजक पित्त व मेदोधात्वाग्नि
🌊 स्रोतस: रक्तवह व मेदोवह स्रोतस
🩺 15 रोग
आयुर्वेदिक शरीर-क्रिया विज्ञान (Pathophysiology):
रंजक पित्त (रस को रक्त में बदलना) और धात्वाग्नि का मुख्य केंद्र। यकृत मंदता से फैटी लिवर, पीलिया, टाइप-2 मधुमेह, थायरॉइड, मोटापा व शरीर में टॉक्सिन (आमदोष) संचय होता है।
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समस्त लक्षण (15)
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पीलिया (जॉन्डिस) व यकृत विकार
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मधुमेह (डायबिटीज), शुगर व प्रमेह रोग
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लू लगना, अत्यधिक गर्मी व शरीर में पानी की कमी
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प्लीहा वृद्धि व तिल्ली बढ़ना
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शरीर में पानी भरना, पैरों की सूजन (शोथ रोग)
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सदा थकान रहना, ऊर्जा की कमी व दौर्बल्य
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मोटापा, पेट की चर्बी व स्थौल्य रोग
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थायराइड (हाइपोथायरायडिज्म), वजन बढ़ना व गलगंड
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मेटाबॉलिक सिंड्रोम व संपूर्ण चयापचय विकार
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फैटी लिवर व यकृत की सूजन
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अकारण वजन गिरना, अत्यधिक दुबलापन (कार्श्य)
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बीमारी के बाद की कमजोरी व स्वास्थ्य लाभ
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डायबिटीज में पैरों की जलन, सुन्नपन व तलवों में आग
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पुराना धीमा बुखार, हड्डियों की हरारत (जीर्ण ज्वर)
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प्री-डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस व बॉर्डरलाइन शुगर
