❤️ हृदय व रक्त परिसंचरण
हृदय / रक्तवाहिनी (Hridaya & Raktavaha)
⚡ दोष: व्यान वात व साधक पित्त
🌊 स्रोतस: रक्तवह व रसवह स्रोतस
🩺 12 रोग
आयुर्वेदिक शरीर-क्रिया विज्ञान (Pathophysiology):
चेतना और ओज का मुख्य केंद्र। व्यान वात रक्त के निरंतर संचार को संचालित करता है और साधक पित्त मनोभावों को नियंत्रित करता है। धमनी रुकावट से उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल व धड़कन तेज होती है।
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लक्षण अथवा विशिष्ट रोग अनुसार नुस्खे चुनें:
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समस्त लक्षण (12)
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उच्च रक्तचाप, हाई बीपी व धमनियों का तनाव
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खराब रक्त संचार, हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे रहना
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उच्च कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स व रक्त में चर्बी
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रक्त विकार, अशुद्ध खून व रक्तशोधन की आवश्यकता
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निम्न रक्तचाप, लो बीपी व कमजोरी
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सीने में भारीपन, खिंचाव व हृच्छूल की पूर्व चेतावनी
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हृदय की कमजोरी, निर्बलता व हृद्दौर्बल्य
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धमनियों में रुकावट, ब्लॉक व हृदय की सफाई
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रक्त का गाढ़ापन व थक्के बनने की प्रवृत्ति
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दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट व हृद्द्रव
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संक्रमण उपरांत दिल की कमजोरी व थकावट
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वेरिकोज वेन्स, नीली नसों का फूलना व शिराग्रंथि
