कील-मुंहासे, युवानपिड़का व फुंसियां
Yuvanapidika / Mukhadushika (युवानपिड़का)
रक्त व पित्त के दूषित होने से चेहरे की तैलीय ग्रंथियों में मवाद व फुंसियां बनना।
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Yuvanapidika / Mukhadushika (युवानपिड़का)
रक्त व पित्त के दूषित होने से चेहरे की तैलीय ग्रंथियों में मवाद व फुंसियां बनना।
Vidradhi & Pitika (विद्रधि)
बाल टूटने या रक्त दूषित होने से त्वचा के भीतर मवाद से भरी दर्दनाक गांठ बनना।
Vipadika (विपादिका)
वात के रूखेपन के कारण एड़ियों की त्वचा का फटना व बिवाइयां होना।
Darunaka (दारुणक)
वात के रूखेपन व कफ के मेल से सिर की त्वचा पर पपड़ीदार रूसी व खुजली होना।
Karnika & Akshi Parivesha (अक्षि परिवेष)
अनिद्रा, मानसिक तनाव व स्क्रीन देखने से आंखों के आसपास की नसों का काला दिखना।
Oshthaprakopa (ओष्ठप्रकोप)
होंठों में तैलीय ग्रंथियां न होने से वात द्वारा होंठों का सूखना व फटना।
Vicharchika (विचर्चिका)
कफ व पित्त के रक्त में मिलने से त्वचा पर छाजन (एक्जिमा) होना व चिपचिपे स्राव का बहना।
Khalitya (खालित्य)
पित्त की अतिरिक्त गर्मी द्वारा बालों की जड़ों को सुखा देना जिससे बाल झड़ने लगते हैं।
Svedadhikya & Daurgandhya (स्वेदाधिक्य)
शरीर में अत्यधिक पित्त व गर्मी से पसीने की दुर्गंध व अधिक मात्रा में स्राव।
Vyanga & Neelika (व्यङ्ग व नीलिका)
भ्राजक पित्त के कुपित होने से त्वचा पर मेलेनिन का अधिक संचय व झाइयां बनना।
Vali (वली)
रस व मांस धातु के क्षीण होने से त्वचा का लचीलापन घटना व झुर्रियां पड़ना।
Dadru (दद्रु)
कफ व पित्त की विकृति से जांघों या त्वचा पर गोल छल्लेदार दाद व असहनीय खुजली।