दांत में तेज दर्द, कीड़ा लगना व दंतशूल
Dantashula & Krimidanta (दन्तशूल व कृमिदन्त)
दांतों में कृमि (बैक्टीरिया) द्वारा कैविटी बनाना व वात के प्रकोप से तीव्र पीड़ा होना।
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Dantashula & Krimidanta (दन्तशूल व कृमिदन्त)
दांतों में कृमि (बैक्टीरिया) द्वारा कैविटी बनाना व वात के प्रकोप से तीव्र पीड़ा होना।
Sheetada & Danta-Veshta (शीताद)
कफ व रक्त के दूषित होने से मसूढ़ों का स्पंज की तरह फूलना व आसानी से खून बहना।
Nasanaha & Nasa Arsha (नासा अर्श)
नासा गुहा में कफ जमने व मांस बढ़ने से श्वास मार्ग का अवरुद्ध हो जाना।
Mukha Daurgandhya (मुखदौर्गन्ध्य)
आमाशय के कच्चे आमदोष व जीभ पर जमे मैल से सांसों में दुर्गंध पैदा होना।
Mukhashosha (मुखशोष)
वात के रूखेपन व पित्त की गर्मी से मुंह में लार ग्रंथियों का सूख जाना।
Karnasrava (कर्णस्राव)
कान के भीतर कफ व पित्त के प्रदाह से कान का बहना व मवाद निकलना।
Karnashula (कर्णशूल)
ठंडी हवा लगने या मैल जमने से कान के पर्दे में वात का अवरोध व तीव्र कर्णशूल।
Netradaha & Netrasrava (नेत्रदाह)
आलोचक पित्त के असंतुलन व कंप्यूटर-फोन देखने से आंखों में रूखापन, जलन व थकान।
Arasajnata (अरसज्ञता)
बोधक कफ के दूषित होने से स्वाद ग्रंथियों का काम न करना व खाने का कोई स्वाद न मिलना।
Mukha Paka (मुखपाक)
पेट की गर्मी व पित्त के बढ़ने से मुख की त्वचा का छिलना व दर्दनाक छाले होना।
Urdhwaga Raktapitta / Nasagata Rakta (नकसीर)
गर्मी या तीखे पदार्थों से पित्त कुपित होकर रक्त के साथ नाक की पतली नसों को फाड़कर बहना।
Puyadanta / Danta-Harsha (पूयदन्त / पायरिया)
मसूढ़ों की जड़ों में मवाद (पूय) पड़ने से दांतों की पकड़ कमजोर होना व दांत हिलना।