सदा थकान रहना, ऊर्जा की कमी व दौर्बल्य
Daurbalya & Ojo-Kshaya (दौर्बल्य व ओजःक्षय)
रस धातु व ओज के क्षीण होने से शरीर की समस्त ऊर्जा व कार्यक्षमता का समाप्त होना।
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Daurbalya & Ojo-Kshaya (दौर्बल्य व ओजःक्षय)
रस धातु व ओज के क्षीण होने से शरीर की समस्त ऊर्जा व कार्यक्षमता का समाप्त होना।
Jirna Jwara / Asthigata Jwara (जीर्ण ज्वर)
अस्थि व मज्जा धातु में छिपे पुराने बुखार के विष जिससे सदा हरारत व कमजोरी रहती है।
Pada Daha & Suptata (पाद दाह)
रक्त में अधिक शुगर रहने से पैरों की नसों का जलना व तलवों में असहनीय जलन होना।
Aatapashula & Ushnavata (लू लगना)
गर्मियों में लू के तीखे प्रभाव से शरीर का पानी सूखना, पित्त कुपित होना व बेहोशी आना।
Galaganda & Dhatvagni Mandya (गलगण्ड)
थायराइड ग्रंथि के धीमे पड़ने से चयापचय (मेटाबॉलिज्म) का मंद होना व चर्बी का संचय।
Ama Sanchaya & Medo-Dhatu Dushti
शरीर के सभी चयापचय तंत्रों का एक साथ बिगड़ना व समग्र स्वास्थ्य पर संकट।
Sthaulya / Medoroga (स्थौल्य व मेदोरोग)
कफ व मेद धातु के अनियंत्रित संचय से शरीर का बेडौल व स्थूल हो जाना।
Jwaramukta Daurbalya (ज्वरमुक्त दौर्बल्य)
दीर्घ रोग के पश्चात शरीर की समस्त धातुओं का क्षीण होना जिन्हें रसायन आहार से पुष्ट किया जाता है।
Purvarupa Prameha (प्रमेह पूर्वरूप)
कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन को न पहचानना जिससे भोजन के बाद रक्त शर्करा तेजी से उछलती है।
Madhumeha / Prameha (मधुमेह)
मेद धातु की विकृति व अग्न्याशय की कमजोरी से रक्त में शर्करा (शुगर) का अनियंत्रित बढ़ना।
Karshya (कार्श्य)
वात के रूखेपन से मांस व मेद धातु का सूखना व शरीर का अत्यधिक दुर्बल होना।
Shotha / Shopha (शोथ)
कफ व वात की विकृति से रस व जल धातु का त्वचा के नीचे ठहरना व सूजन पैदा करना।