पेट के कीड़े (कृमि रोग)
Purishaja Krimi (पुरीषज कृमि)
आंतों में कफ व मीठे खाद्य पदार्थों के संचय से उत्पन्न परजीवी कृमि।
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Purishaja Krimi (पुरीषज कृमि)
आंतों में कफ व मीठे खाद्य पदार्थों के संचय से उत्पन्न परजीवी कृमि।
Grahani Roga (ग्रहणी रोग)
ग्रहणी कला की दुर्बलता जिससे भोजन पचे बिना ही शरीर से बाहर निकल जाता है।
Kamala (कामला)
पित्त के रक्त में मिल जाने से त्वचा, आंखें व मूत्र पीले हो जाते हैं व यकृत कमजोर होता है।
Aruchi & Agnimandya (अरुचि व मन्दाग्नि)
जठराग्नि के मंद होने से भोजन में अरुचि होना व भूख का समाप्त हो जाना।
Parinama Shula & Vrana (परिणाम शूल)
आमाशय व आंतों की अंदरूनी परत में तीखे पित्त व अम्ल द्वारा घाव (अल्सर) बन जाना।
Arsha & Parikartika (अर्श व परिकर्तिका)
पुरानी कब्ज व अत्यधिक जोर लगाने से गुदा की नसों का फूलना व मस्से बनना।
Plihodara (प्लीहोदर)
पुराने मलेरिया या यकृत विकार के कारण प्लीहा (तिल्ली) का आकार बढ़ जाना।
Chhardi (छर्दि)
उदान वायु के विपरीत प्रवाह से आमाशय का भोजन मुख मार्ग से बाहर फेंकना।