रक्त विकार, अशुद्ध खून व रक्तशोधन की आवश्यकता
रक्त में पित्त व विषैले तत्वों के मिल जाने से शरीर पर फोड़े, दाद व चर्म विकारों का होना।
प्रमुख लक्षण व संकेत
- बार-बार फोड़े-फुंसी निकलना
- त्वचा में खुजली
- मुंह का कड़वा स्वाद
- खून की खराबी
दोष व स्रोतस (शरीर क्रिया)
यह विकार मुख्य रूप से Pitta-Rakta के असंतुलन से उत्पन्न होता है, जो हृदय, रक्त संचार व बीपी को प्रभावित करता है।
✅ पथ्य (क्या सेवन करें / हितकारी)
सुपाच्य, ताजा व गर्म भोजन, गुनगुना पानी, हरी मूंग दाल, परवल, घी का संयमित प्रयोग, समय पर भोजन व पर्याप्त निद्रा।
⚠️ अपथ्य (परहेज / क्या न खाएं)
अत्यधिक मिर्च-मसाले, तला-भुना भोजन, बासी खाना, शीतल पेय (फ्रिज का पानी), दिन में सोना, मानसिक तनाव व देर रात तक जागना।
आपातकालीन चेतावनी व लाल झंडे (Red Flags)
घरेलू नुस्खे केवल सामान्य व प्रारंभिक अवस्था के लिए हैं। यदि तेज सीने में दर्द, सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, बेहोशी, मल या उल्टी में खून, या 3 दिन से अधिक तेज बुखार हो, तो तुरंत निकटतम अस्पताल अथवा योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।
