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तीन महाबंध: मूल बंध, उड्डियान बंध, जालंधर बंध एवं महाबंध साधना विधि व सावधानियां

बंध साधना कैलकुलेटर द्वारा मूल बंध, उड्डियान और जालंधर बंध लगाने की सही विधि जानें। प्राण को सुषुम्ना में प्रवाहित करने वाले महाबंध का संपूर्ण शास्त्रीय मार्गदर्शन।

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लेखक: 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

हठयोग में प्राणायाम और आसन से उत्पन्न होने वाली असीम ऊर्जा को शरीर के भीतर सुरक्षित रखने और उसे रीढ़ की हड्डी (सुषुम्ना नाड़ी) से ऊपर उठाने के लिए बंध (Energy Locks) का विधान है। मुख्य रूप से तीन बंध होते हैं: मूल बंध (पेल्विक फ्लोर का संकुचन), उड्डियान बंध (पेट को रीढ़ की ओर खींचना) और जालंधर बंध (ठोड़ी को कंठ कूप में लगाना)। जब इन तीनों बंधों को एक साथ लगाया जाता है, तो उसे महाबंध कहते हैं। हठयोग प्रदीपिका के अनुसार महाबंध बुढ़ापे और अकाल मृत्यु को जीतने वाला दिव्य अभ्यास है। क्रियास्य बंध स्टूडियो आपको इन बंधों का सुरक्षित और वैज्ञानिक अभ्यास सिखाता है।

तीन प्रमुख बंध एवं उनके लाभ

  • मूल बंध: गुदा और जननेंद्रिय के मध्य भाग को ऊपर खींचना; प्राण व अपान का मिलन कराता है।
  • उड्डियान बंध: बाह्य कुम्भक में पेट को अंदर और ऊपर खींचना; आंतों व पैंक्रियाज को नया जीवन देता है।
  • जालंधर बंध: गर्दन को झुकाकर ठोड़ी को सीने के गड्ढे में लगाना; थायरॉयड और रक्तचाप को संतुलित करता है।
  • महाबंध: तीनों बंधों का एक साथ प्रयोग; कुंडलिनी जागरण का सबसे शक्तिशाली साधन।

बंध साधना का शास्त्रीय अभ्यास करें

क्रियास्य बंध स्टूडियो द्वारा अपनी श्वास क्षमता के अनुसार बंधों का सुरक्षित अभ्यास सीखें।

बंध स्टूडियो खोलें→
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