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हठयोग में षट्कर्म: छह आंतरिक शुद्धि क्रियाएं (नेति, धौति, नौलि, त्राटक) एवं स्वास्थ्य लाभ

षट्कर्म शुद्धि कैलकुलेटर द्वारा जानें हठयोग की छह प्राचीन शोधन क्रियाएं। जल नेति, कुंजल धौति, नौलि और त्राटक द्वारा आंतरिक डिटॉक्स की शास्त्रीय विधि।

English Edition Read in Hindi
By 2 min read Updated October 23, 2026

हठयोग का स्पष्ट निर्देश है कि जब तक शरीर के भीतर कफ, पित्त और मल का अत्यधिक संचय रहता है, तब तक प्राणायाम और ध्यान का पूर्ण फल नहीं मिल सकता। शरीर को आंतरिक रूप से निर्मल करने के लिए हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता में षट्कर्म (छह शुद्धि क्रियाएं) का विधान है। यह छह क्रियाएं हैं: नेति (नासिका शुद्धि), धौति (आमाशय शुद्धि), नौलि (पेट की मांसपेशियों का मंथन), बस्ती (आंतों की सफाई), कपालभाति (मस्तिष्क शुद्धि) और त्राटक (नेत्र ज्योति व एकाग्रता)। क्रियास्य षट्कर्म स्टूडियो इन पावन क्रियाओं का प्रामाणिक व सुरक्षित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

छह प्रमुख शुद्धि क्रियाएं

  • जल नेति व सूत्र नेति: साइनस, जुकाम और एलर्जी से मुक्ति दिलाने वाली नासिका शुद्धि।
  • कुंजल (धौति क्रिया): पेट की अतिरिक्त एसिडिटी और कफ को बाहर निकालने का सुरक्षित तरीका।
  • नौलि क्रिया: पेट के अंगों का चक्राकार मंथन जो जठराग्नि को प्रचंड करता है।
  • त्राटक: दीपक की लौ पर अपलक दृष्टि टिकाना; आंखों की रोशनी और आज्ञा चक्र को जाग्रत करता है।

षट्कर्म शुद्धि क्रियाओं का अध्ययन करें

क्रियास्य षट्कर्म स्टूडियो द्वारा इन क्रियाओं की सही विधि, सावधानियों और लाभों को विस्तार से जानें।

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संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

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