Skip to main content
Tools

लगातार अवसादग्रस्तता विकार (डिस्टीमिया): CBASP थेरेपी, डबल डिप्रेशन और रिकवरी

दो वर्षों से अधिक रहने वाले क्रोनिक डिप्रेशन के लक्षण, डबल डिप्रेशन का खतरा और CBASP परिस्थितिजन्य विश्लेषण पर 19 पाठ।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 2 min read Updated October 23, 2026

लगातार अवसादग्रस्तता विकार (Persistent Depressive Disorder - PDD / डिस्टीमिया) एक क्रोनिक मूड विकार है जिसमें कम से कम दो लगातार वर्षों तक अधिकांश दिनों में उदासी, ऊर्जा की कमी, कम आत्मसम्मान और निराशा बनी रहती है। भले ही इसके लक्षण तीव्र अवसाद जितने नाटकीय न दिखें, परंतु वर्षों तक बने रहने के कारण व्यक्ति यह मानने लगता है कि "मेरा स्वभाव ही ऐसा उदास और थका हुआ है।" जेम्स पी. मैककुलो की CBASP थेरेपी पर आधारित लगातार अवसादग्रस्तता विकार मनोशिक्षा मॉड्यूल 19 पाठों में 'डबल डिप्रेशन', सीखी गई लाचारी (learned helplessness) और व्यवहारिक विश्लेषण का संपूर्ण समाधान प्रस्तुत करता है।

'डबल डिप्रेशन' और स्वभाव मान लेने की भूल

डिस्टीमिया से पीड़ित व्यक्ति अक्सर अपने क्रोनिक डिप्रेशन को अपना व्यक्तित्व मान लेता है, जिससे वह उपचार लेने में वर्षों की देरी कर देता है। इसके ऊपर जब अचानक गंभीर डिप्रेशन का दौरा पड़ता है, तो इसे 'डबल डिप्रेशन' कहा जाता है।

मैककुलो की CBASP तकनीक: परिस्थितियों का विश्लेषण

उपचार में व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से दिखाया जाता है कि उसके शब्दों और व्यवहार का दूसरों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे उसकी यह गलत धारणा टूटती है कि "चाहे मैं कुछ भी करूँ, कुछ नहीं बदलने वाला।"

संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

Share This Insight Tools

दो वर्षों से अधिक रहने वाले क्रोनिक डिप्रेशन के लक्षण, डबल डिप्रेशन का खतरा और CBASP परिस्थितिजन्य विश्लेषण पर 19 पाठ।

लगातार अवसादग्रस्तता विकार (डिस्टीमिया): CBASP थेरेपी, डबल डिप्रेशन और रिकवरी

Share to WhatsApp Post