लगातार अवसादग्रस्तता विकार (Persistent Depressive Disorder - PDD / डिस्टीमिया) एक क्रोनिक मूड विकार है जिसमें कम से कम दो लगातार वर्षों तक अधिकांश दिनों में उदासी, ऊर्जा की कमी, कम आत्मसम्मान और निराशा बनी रहती है। भले ही इसके लक्षण तीव्र अवसाद जितने नाटकीय न दिखें, परंतु वर्षों तक बने रहने के कारण व्यक्ति यह मानने लगता है कि "मेरा स्वभाव ही ऐसा उदास और थका हुआ है।" जेम्स पी. मैककुलो की CBASP थेरेपी पर आधारित लगातार अवसादग्रस्तता विकार मनोशिक्षा मॉड्यूल 19 पाठों में 'डबल डिप्रेशन', सीखी गई लाचारी (learned helplessness) और व्यवहारिक विश्लेषण का संपूर्ण समाधान प्रस्तुत करता है।
⚖️ स्वास्थ्य व विधिक सुरक्षा अस्वीकरण
यह डिजिटल स्व-सहायता अभ्यास और मार्गदर्शिका केवल सामान्य मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यक्तिगत आत्म-जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, नैदानिक मनोवैज्ञानिक परीक्षण, मनोचिकित्सा या डॉक्टर-मरीज संबंध का विकल्प नहीं है। यदि किसी भी शारीरिक या श्वास अभ्यास से आपको बेचैनी अथवा मानसिक तनाव महसूस हो, तो तुरंत रुकें और योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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'डबल डिप्रेशन' और स्वभाव मान लेने की भूल
डिस्टीमिया से पीड़ित व्यक्ति अक्सर अपने क्रोनिक डिप्रेशन को अपना व्यक्तित्व मान लेता है, जिससे वह उपचार लेने में वर्षों की देरी कर देता है। इसके ऊपर जब अचानक गंभीर डिप्रेशन का दौरा पड़ता है, तो इसे 'डबल डिप्रेशन' कहा जाता है।
मैककुलो की CBASP तकनीक: परिस्थितियों का विश्लेषण
उपचार में व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से दिखाया जाता है कि उसके शब्दों और व्यवहार का दूसरों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे उसकी यह गलत धारणा टूटती है कि "चाहे मैं कुछ भी करूँ, कुछ नहीं बदलने वाला।"
