हठयोग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता एवं शिव संहिता के मूल श्लोक, पदच्छेद (पदार्थ), यौगिक रहस्य एवं त्रि-ध्वनि गुरु व्याख्यान।
कल्याण अस्वीकरण / Wellness Disclaimer:
यहाँ प्रस्तुत योग अभ्यास, मुद्राएँ और श्वास तकनीकें शास्त्रीय परंपरा पर आधारित हैं और केवल शैक्षिक, कल्याण और समग्र जीवनशैली के उद्देश्यों के लिए हैं। ये किसी चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। कोई भी नया शारीरिक अभ्यास शुरू करने से पहले, विशेष रूप से यदि आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है या आप गर्भवती हैं, तो योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। अपने शरीर की सहज सीमा में ही अभ्यास करें।
पदार्थ (शब्दार्थ):
सुख (To the happy) मैत्री (friendliness) दुःख (to the suffering) करुणा (compassion) पुण्य (to the virtuous) मुदिता (joy/delight) अपुण्य (to the unvirtuous/harmful) उपेक्षाणाम् (equanimous neutrality) भावनातः (by cultivating these attitudes) चित्त-प्रसादनम् (the mind attains undisturbed clarity and serenity).
भावार्थ:
सुखी जनों के प्रति मैत्री, दुःखियों के प्रति करुणा, पुण्यात्माओं के प्रति प्रसन्नता (मुदिता), और दुराचारियों के प्रति उपेक्षा (तटस्थता) की भावना रखने से चित्त में निर्मल शांति और प्रसन्नता उत्पन्न होती है।
यौगिक रहस्य व भाष्य:
सामाजिक संबंधों में मानसिक शांति बनाए रखने के लिए पतंजलि के ये चार व्यवहार सूत्र अत्यंत व्यावहारिक हैं।
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साधन पाद: अष्टांग योग एवं क्रियायोग
प्रमुख विषय: क्रियायोग, 5 क्लेश (अविद्या आदि), अष्टांग योग के 8 अंग और उनके सिद्धि लक्षण