आयुर्वेद में भोजन को केवल पोषक तत्व नहीं, बल्कि साक्षात औषधि माना गया है। किसी भी खाद्य पदार्थ के औषधीय प्रभाव को जानने के लिए चार सिद्धांतों का अध्ययन किया जाता है: रस (जिह्वा पर स्वाद), गुण (शारीरिक प्रभाव), वीर्य (पाचन में उत्पन्न तासीर — ठंडा या गर्म) और विपाक (पाचन के बाद शरीर के धातुओं पर अंतिम प्रभाव)। जब कोई व्यक्ति इन चार आयामों को समझकर भोजन चुनता है, तो उसका आहार स्वतः ही रोगों का निवारण करने लगता है। क्रियास्य आहार विज्ञान स्टूडियो इन चारों शास्त्रीय नियमों का संपूर्ण विश्लेषण प्रदान करता है।
आहार के चार प्रमुख आधार
- षड्रस (छह रस): मधुर, अम्ल (खट्टा), लवण (नमकीन), कटु (तीखा), तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला)। संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए थाली में सभी छह रसों का संतुलन अनिवार्य है।
- वीर्य (तासीर): शीत वीर्य (ठंडी प्रकृति जो पित्त को शांत करती है) और उष्ण वीर्य (गर्म प्रकृति जो अग्नि को प्रज्वलित करती है)।
- विपाक: पाचन क्रिया पूर्ण होने के बाद शरीर पर पड़ने वाला अंतिम त्रिदोष प्रभाव।
खाद्य पदार्थों के औषधीय गुण जानें
क्रियास्य आहार स्टूडियो द्वारा अपने दैनिक अनाजों, दालों और मसालों के रस, वीर्य व विपाक की जांच करें।
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