किसी भी भवन निर्माण से पूर्व सबसे महत्वपूर्ण चरण भूखंड का परीक्षण करना होता है। मयमतम् और मानसार के अनुसार भूमि की ढलान, मिट्टी का रंग व गंध, भूखंड का आकार और उस पर आने वाले रास्तों का प्रभाव (जिसे वीथी शूल या रोड हिट कहते हैं) संपूर्ण वास्तु का 50% निर्धारण कर देते हैं। यदि कोई सड़क उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) से भूखंड की ओर आती है, तो वह अपार धन और सौभाग्य लाती है; परंतु यदि सड़क दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) से टकराती है, तो वह आकस्मिक दुर्घटना, आर्थिक नुकसान या मुकदमेबाजी का कारण बन सकती है। क्रियास्य भूखंड परीक्षण लेंस भूमि क्रय अथवा निर्माण से पूर्व संपूर्ण शास्त्रीय जांच करता है।
भूखंड की ढलान के चार शास्त्रीय फल
- ईशान प्लव (उत्तर-पूर्व की ओर ढलान): सर्वोत्तम स्थिति; निरंतर धन आगमन, सुख-शांति और उत्तम स्वास्थ्य।
- नैऋत्य प्लव (दक्षिण-पश्चिम की ओर ढलान): अत्यंत दोषपूर्ण; संचित धन का नाश और गृहस्वामी को भारी संकट।
- आग्नेय प्लव (दक्षिण-पूर्व की ओर ढलान): व्यर्थ का खर्च और अग्नि भय।
- वायव्य प्लव (उत्तर-पश्चिम की ओर ढलान): मानसिक अस्थिरता और परिजनों में विवाद।
अपने भूखंड का संपूर्ण वास्तु परीक्षण करें
क्रियास्य भूखंड लेंस द्वारा जमीन की ढलान, सड़क की दिशा और वीथी शूल का शास्त्रीय समाधान जानें।
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