आधुनिक आहार विज्ञान केवल कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा पर ध्यान देता है, परंतु आयुर्वेद यह देखता है कि विभिन्न खाद्य पदार्थ पेट में जाकर एक-दूसरे के साथ कैसा रासायनिक और ऊर्जावान व्यवहार करते हैं। जब दो विरोधी स्वभाव वाले भोजन एक साथ खाए जाते हैं, तो उसे विरुद्ध आहार (Incompatible Food) कहा जाता है। चरक संहिता के अनुसार विरुद्ध आहार धीमे विष (गर विष) की तरह कार्य करता है, जो त्वचा रोग, एलर्जी, सोरायसिस और ऑटोइम्यून बीमारियों का प्रमुख कारण बनता है। क्रियास्य आहार विवेक स्टूडियो आपके भोजन के तालमेल का शास्त्रीय परीक्षण करता है।
प्रमुख घातक विरुद्ध आहार
- दूध और खट्टे फल (अथवा केला): दूध शीतल है और खट्टे फल उष्ण व अम्लीय। इनके संयोग से दूध पेट में फट जाता है और आंतों में विषाक्तता पैदा करता है।
- शहद और घी की बराबर मात्रा: समान भार में शहद और घी का मिश्रण शास्त्रानुसार विषैला प्रभाव देता है।
- शहद को गर्म करना: शहद को पकाना या खौलते पानी में डालना वर्जित है; यह आंतों में चिपकने वाला गाढ़ा टॉक्सिन बनाता है।
- मछली और दूध: मछली अत्यंत गर्म है और दूध ठंडा; यह रक्त को दूषित कर कुष्ठ व चर्म रोग पैदा करता है।
अपने खान-पान में विरुद्ध आहार की जांच करें
क्रियास्य आहार विवेक स्टूडियो द्वारा अपने दैनिक व्यंजनों का विश्लेषण करें और अवांछित रोगों से बचें।
आहार स्टूडियो खोलें→क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।
