शिव पुराण, पद्म पुराण और रुद्राक्षजाबाल उपनिषद् में रुद्राक्ष को भगवान शिव का साक्षात् अश्रु-स्वरूप माना गया है (‘रुद्र’ अर्थात् शिव और ‘अक्ष’ अर्थात् नयन या अश्रु)। आधुनिक वैज्ञानिक शोधों ने भी प्रमाणित किया है कि असली रुद्राक्ष में विशिष्ट विद्युत-चुम्बकीय (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक) गुण और बायो-रेजिस्टेंस होता है। जब इसे हृदय के समीप धारण किया जाता है, तो यह रक्तचाप को संतुलित करता है, घबराहट और अवसाद को दूर करता है और मस्तिष्क की तरंगों को शांत करता है। लेकिन 1 से लेकर 14 मुखी तक प्रत्येक रुद्राक्ष का अपना एक विशिष्ट अधिपति ग्रह, देवता और चक्र होता है। बिना कुंडली विश्लेषण और बिना प्राण-प्रतिष्ठा के रुद्राक्ष धारण करने से उसका पूर्ण आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता। वैदिक रुद्राक्ष चयन साधन (Rudraksha Selection) आपकी जन्म कुंडली के आधार पर अनुकूल मुखी रुद्राक्ष और उसकी शास्त्रीय प्राण-प्रतिष्ठा विधि का ज्ञान कराता है।
अपनी कुंडली के अनुकूल सही मुखी रुद्राक्ष जानें
1 से 14 मुखी रुद्राक्ष में से अपने लिए सबसे शुभ रुद्राक्ष की पहचान करें। प्राण-प्रतिष्ठा मंत्र, गंगाजल-कच्चे दूध से अभिषेक विधि और धारण करने के नियम देखें।
1 से 7 मुखी रुद्राक्ष का ज्योतिषीय महत्व
प्रत्येक मुखी रुद्राक्ष विशिष्ट ग्रह और देवता की कृपा प्रवाहित करता है:
रत्नों के विपरीत असली रुद्राक्ष का कभी कोई दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) नहीं होता, क्योंकि इसका स्वभाव परम सात्विक है। सोमवार को कच्चे दूध और गंगाजल से अभिषेक करके इसे धारण करना चाहिए।
अपनी कुंडली के लिए शुभ रुद्राक्ष जानें
जन्म विवरण दर्ज करें और अपनी दशा व लग्न के अनुसार सबसे उपयुक्त रुद्राक्ष का परामर्श लें।
रुद्राक्ष जांचें →क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।
