सनातन धर्म में मंत्र (संस्कृत: मननात् त्रायते इति मन्त्रः—जो मनन करने पर रक्षा करे) केवल कुछ शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय नाद का विज्ञान है। वैदिक ऋषियों ने ध्यान की उच्चतम समाधि में जिन ध्वनियों को साक्षात अनुभूत किया, वे मंत्र कहलाए। किसी भी सिद्ध मंत्र के छह अंग होते हैं: ऋषि, छंद, देवता, बीज, शक्ति और कीलक। जब शुद्ध उच्चारण और एकनिष्ठ भाव से मंत्र का जप किया जाता है, तो यह मस्तिष्क की तरंगों को शांत कर चक्रों को जाग्रत करता है और जन्म-जन्मांतर के संचित संस्कारों को शुद्ध करता है। वैदिक मंत्र साधना पोर्टल पर गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, नवार्ण मंत्र सहित सभी प्रमुख वैदिक व बीज मंत्रों का प्रामाणिक पाठ, ऑडियो और जप विधान प्रस्तुत है।
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मंत्र जप की तीन प्रमुख विधियां और उनका प्रभाव
| जप विधि | ध्वनि व शारीरिक प्रक्रिया | शास्त्रीय फल व प्रभाव |
|---|---|---|
| वैखरी जप (सस्वर जप) | स्पष्ट वाणी में बोलना जिसे अन्य लोग भी सुन सकें। | आरंभिक साधकों के लिए मन की चंचलता रोकने और शुद्ध उच्चारण सीखने हेतु उत्तम। |
| उपांशु जप (फुसफुसाहट) | केवल होंठ और जिह्वा हिलते हैं, ध्वनि केवल स्वयं को सुनाई देती है। | वैखरी जप की तुलना में 100 गुना अधिक फलदायी माना गया है; इंद्रियों को अंतर्मुखी करता है। |
| मानसिक जप (मौन जप) | न होंठ हिलते हैं न जिह्वा; केवल मन में मंत्र का निरंतर प्रवाह चलता है। | सर्वश्रेष्ठ और सहस्त्र गुना प्रभावशाली; यह साधक को सहज समाधि और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाता है। |
जप माला के प्रयोग के 3 अनिवार्य नियम
- उचित माला का चयन: भगवान विष्णु के लिए तुलसी की माला, शिवजी व देवी के लिए रुद्राक्ष की माला, और मां लक्ष्मी के लिए कमलगट्टे या स्फटिक की माला श्रेष्ठ है।
- अंगुलियों का नियम: जप करते समय माला को मध्यमा (बीच की) अंगुली और अंगूठे से आगे बढ़ाएं; तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) का स्पर्श माला से कभी न कराएं।
- सुमेरु का उल्लंघन न करें: 108 मनकों के बाद सबसे बड़े मनके (सुमेरु) को पार न करें; वहीं से माला को उलट कर अगला चक्र आरंभ करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मंत्र का जप 108 बार ही क्यों किया जाता है?
खगोल विज्ञान और अध्यात्म में 108 का विशेष महत्व है। 12 राशियां और 9 ग्रहों का गुणनफल 108 होता है। मानव शरीर में 108 प्रमुख ऊर्जा नाड़ियां हृदय चक्र पर मिलती हैं, इसलिए 108 बार जप करने से संपूर्ण शरीर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है।
क्या बिना गुरु दीक्षा के मंत्र जप किया जा सकता है?
महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र, पंचाक्षरी (ॐ नमः शिवाय), और द्वादशाक्षर (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) जैसे सात्विक और पौराणिक मंत्रों का जप कोई भी श्रद्धापूर्वक कर सकता है। तंत्रोक्त उग्र मंत्रों के लिए गुरु दीक्षा आवश्यक होती है।
