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Spirituality

वार पक्ष स्वर नियम: घटी काल व कार्य समय नियम

वार पक्ष स्वर नियम के अनुसार नासिका परिवर्तन के सटीक घटी नियम, समयावधि और कार्य सिद्धि के मुहूर्त जानिए। पढ़िए क्रियास्य पर सरल हिंदी में।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 3 min read Updated October 30, 2026

वैदिक योग परंपरा में शिव स्वरोदय को अत्यंत गोपनीय और चमत्कारी विज्ञान माना गया है। नासिका से चलने वाला प्रत्येक श्वास केवल प्राण वायु नहीं, अपितु जीवन और भाग्य की दिशा तय करने वाला सूक्ष्म स्पंदन है। वार पक्ष स्वर नियम: रविवार, मंगलवार व शनिवार को सूर्य स्वर की श्रेष्ठता और कार्य नियम के नियमों को समझकर मनुष्य अपने जीवन में अद्भुत सफलता, आरोग्य और मानसिक शांति प्राप्त कर सकता है।

दैनिक प्राणिक चक्र और घटी काल मापन के शास्त्रीय नियम

स्वर योग मुख्य सार: प्रकृति के नियमानुसार प्रति ढाई घटी (लगभग एक घंटा) में श्वास का स्वर बदलता है, जो शरीर और मन को नई ऊर्जा प्रदान करता है। वार पक्ष स्वर नियम के विषय में भगवान शिव का आदेश है कि चलते हुए स्वर और पंचतत्व की पहचान कर कार्य करने वाला साधक कभी पराजित नहीं होता और उसे हर क्षेत्र में विजय मिलती है।

सप्ताह के दिनों का ग्रहों के साथ सीधा संबंध होता है। रविवार, मंगलवार और शनिवार उग्र व साहसिक दिन हैं; इन दिनों सूर्योदय के समय सूर्य स्वर (दाहिना नथुना) चलना परम शुभ होता है, जिससे पूरे दिन कार्यों में विजय और शक्ति बनी रहती है।

प्राणिक कारक व शास्त्रीय विश्लेषण

शिव स्वरोदय शास्त्र के अनुसार इस स्वर स्थिति से जुड़े मुख्य प्राणिक व ज्योतिषीय आयाम निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं:

स्वर आयामशास्त्रीय ज्योतिषीय कारकतात्कालिक फलादेश व प्रभाव
मुख्य अधिष्ठाता नाड़ीसूर्य, मंगल एवं शनि / अग्नि एवं सूर्य ऊर्जासूक्ष्म प्राण ऊर्जा का मुख्य संचालक मार्ग
शुभ संख्या स्पंदन१, ३, ८, ९शीघ्र कार्य सिद्धि और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि
सतर्कता सूचक संख्याएं२, ६धैर्य, शांत चित्त और विवेकपूर्ण निर्णय की आवश्यकता
अनुकूल दिन व दिशाएंरविवार, मंगलवार एवं शनिवार / पूर्व एवं दक्षिण दिशाशुभ परिणाम देने वाले पावन कालखंड और दिशाएं
ऊर्जावान शुभ रंगसूर्य स्वर्णिम, गहरा लाल और लोहे जैसा चारकोलसकारात्मक मानसिक शांति और आभामंडल सुरक्षा

सात्विक आहार व दैनिक आचरण नियम

नाड़ियों की निर्मलता और श्वास के सूक्ष्म ज्ञान के लिए आहार-विहार का शुद्ध होना अनिवार्य है। इस काल में निम्नलिखित नियमों का पालन अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

  • हितकारी पथ्य आहार: गेहूं के सात्विक पकवान, भुना चना, गुड़, अदरक की चाय और मीठा अनार
  • त्याज्य आचरण व अपथ्य: इन उग्र दिनों में नाजुक समझौते करना, बहुत ठंडा पानी पीना और कायरता या आलस्य दिखाना

तात्कालिक ग्रह शांति व स्वर उपाय

यदि रविवार या मंगलवार को उठते समय बायां स्वर चल रहा हो, तो ५ मिनट बाईं करवट लेटकर दाहिना स्वर चालू करके ही उठें

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: रविवार, मंगलवार और शनिवार को दाहिना (सूर्य) स्वर चलना ही क्यों शुभ माना जाता है?
उत्तर: ये दिन सूर्य, मंगल और शनि के उग्र दिन हैं; जब भीतर का स्वर बाहर के ग्रह से मेल खाता है, तो व्यक्ति का पराक्रम और सफलता कई गुना बढ़ जाती है।

प्रश्न: मंगलवार या रविवार को सूर्य स्वर में कौन से काम करने चाहिए?
उत्तर: कानूनी जीत, तकनीकी काम, खेलकूद, साहसिक निर्णय, मशीनरी खरीदना और अपने अधिकारों के लिए बोलना।

प्रश्न: यदि मंगलवार को दिनभर बायां स्वर चलता रहे तो क्या अनुभव होता है?
उत्तर: व्यक्ति को आलस्य आता है, आत्मविश्वास में कमी लगती है और वह सामने वाले के प्रभाव में आसानी से दब जाता है।

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