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Faith & Devotion

वैभव लक्ष्मी व्रत नियम: पूजा का सही समय और नियम

शास्त्रों के अनुसार वैभव लक्ष्मी व्रत नियम का सबसे शुभ मुहूर्त, सही दिशा, आसन और पूजा के जरूरी नियम जानिए। पढ़िए क्रियास्य पर और लाभ उठाइए।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 3 min read Updated October 28, 2026

सनातन धर्म और वैदिक परंपरा में वैभव लक्ष्मी व्रत: शुक्रवार की पूजा, खीर भोग और नियम को अत्यंत कल्याणकारी, संकट मोचन और आत्मिक शांति देने वाला माना गया है। शास्त्रों का स्पष्ट कथन है कि जब कोई व्यक्ति श्रद्धा, नियम और सही विधि से भगवान की पूजा और मंत्र का जप करता है, तो उसके जीवन के बड़े से बड़े कष्ट, भय और ग्रह दोष समाप्त हो जाते हैं।

पूजा और जप का सही समय: शुभ मुहूर्त, बैठने की सही दिशा, आसन और माला चयन के संपूर्ण नियम

वैभव लक्ष्मी व्रत घर से कलह और कंगाली को मिटाने वाला चमत्कारी व्रत है। शुक्रवार की शाम मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने और सोने-चांदी के सिक्के की पूजा करने से घर में बरकत आती है। हमारे पूज्य ग्रंथ Skanda Purana Lakshmi Stotra & Vaibhav Lakshmi Vrata Mahatmya में इस पावन पाठ का विस्तार से वर्णन मिलता है, जो मन और आत्मा को नई ऊर्जा से भर देता है।

पूजा का मुख्य पहलूशास्त्र सम्मत नियमदैनिक जीवन में लाभ
मुख्य देवता व ऊर्जामां वैभव लक्ष्मी (अष्टलक्ष्मी स्वरूपा), धन-वैभव, सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की देवीजीवन में साहस, विजय और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पावन ग्रंथ व आधारSkanda Purana Lakshmi Stotra & Vaibhav Lakshmi Vrata Mahatmyaवाणी में मधुरता और चित्त में एकाग्रता बढ़ती है।
पूजा का सही समयशुक्रवार की शाम को सूर्यास्त के समय; संकल्प अनुसार लगातार 11, 21 या 51 शुक्रवार तकपूजा का सौ गुना अधिक पुण्य और फल प्राप्त होता है।
प्रिय भोग व पुष्पगाय के दूध में बनी चावल की खीर, सोने या चांदी का आभूषण, श्री यंत्र, लाल फूल और उद्यापन पर वैभव लक्ष्मी की पुस्तकेंघर के मंदिर में पवित्रता और देवी-देवताओं का वास होता है।
भूलकर भी न करेंअहंकार से व्रत करना, भैंस के दूध की खीर बनाना, शुक्रवार के दिन खटाई खाना, और किसी पर गुस्सा करनापूजा के खंडित होने और दोष लगने से बचाव होता है।

प्रामाणिक वैदिक मंत्र एवं सरल हिंदी अर्थ

शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी मंत्र का जप करते समय उसका अर्थ समझना जरूरी है। Skanda Purana Lakshmi Stotra & Vaibhav Lakshmi Vrata Mahatmya का यह पावन श्लोक विशेष फलदायी है:

॥ या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशुतेजस्विनी या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्रीमनोल्हादिनी। ॥

सरल हिंदी अर्थ: "She who resides in the red lotus, radiant with the splendor of the sun, clad in divine red garments, the eternal beloved of Lord Hari, delighting the heart of all beings—salutations to Maa Lakshmi."

दैनिक पूजा की सरल चरणबद्ध विधि और जरूरी नियम

शुक्रवार की शाम लाल कपड़े पर श्री यंत्र और सोने-चांदी का सिक्का रखें, चावल की खीर का भोग लगाएं, वैभव लक्ष्मी की कथा पढ़ें और अंत में सभी को खीर का प्रसाद बांटें।

  • स्नान और शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ-सुथरे हल्के वस्त्र पहनें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
  • दीपक और धूप: घर के मंदिर में गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं और सुगंधित धूपबत्ती सुलगाएं।
  • संकल्प और ध्यान: हाथ में थोड़ा सा जल और पुष्प लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करें, फिर जल को प्रभु के चरणों में अर्पित कर दें।
  • आरती और क्षमा प्रार्थना: पाठ पूरा होने के बाद प्रेमपूर्वक आरती करें और अंत में अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें।

शास्त्रोक्त फलश्रुति: नियमित पाठ के चमत्कारी लाभ

जो श्रद्धालु नियमित रूप से इस विधि का पालन करते हैं, उन्हें ये दिव्य परिणाम मिलते हैं: घर में पैसों की तंगी खत्म होना, बंद पड़ा व्यापार फिर से चलना, पति-पत्नी में प्रेम बढ़ना और हर कार्य में सफलता मिलना।

पूजा और पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

क्या पुरुष भी वैभव लक्ष्मी का व्रत रख सकते हैं?

हां; यह व्रत स्त्री और पुरुष दोनों कर सकते हैं; पति-पत्नी यदि मिलकर यह व्रत करें तो घर की दरिद्रता बहुत तेजी से समाप्त होती है।

शुक्रवार के दिन खट्टी चीजें खाने की मनाही क्यों होती है?

मां लक्ष्मी को मधुर रस (मीठा) अत्यंत प्रिय है और खटाई शुक्र ग्रह के प्रभाव को कमजोर करती है; इसलिए इस दिन खट्टी चीजों से परहेज किया जाता है।

वैभव लक्ष्मी व्रत का उद्यापन कैसे किया जाता है?

संकल्प के आखिरी शुक्रवार को खीर का भोग लगाएं, सुहागिन महिलाओं को आदरपूर्वक बुलाकर खीर खिलाएं और वैभव लक्ष्मी की पुस्तकें व श्रृंगार सामग्री भेंट करें।

संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

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शास्त्रों के अनुसार वैभव लक्ष्मी व्रत नियम का सबसे शुभ मुहूर्त, सही दिशा, आसन और पूजा के जरूरी नियम जानिए। पढ़िए क्रियास्य…

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