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अनिश्चितता सहनशीलता अभ्यास: डॉ. डुगास की विधि से असमंजस सहने की आंतरिक क्षमता बढ़ाने का उपाय

चिंता और बार-बार तसल्ली मांगने की आदत से बचें। वैज्ञानिक मनोवैज्ञानिक प्रयोगों से अनिश्चितता में भी शांत रहना सीखें।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 2 min read Updated October 23, 2026

जब भी कोई काम हमारे मनमुताबिक नहीं होता या हमें यह नहीं पता होता कि कल क्या होगा, तो हमारे पेट में मरोड़ उठने लगती है और बेचैनी बढ़ जाती है। मनोवैज्ञानिक डॉ. मिशेल डुगास के अनुसार, इसे 'अनिश्चितता सहन न कर पाना' (Intolerance of Uncertainty) कहा जाता है। ऐसे लोग अनिश्चितता को एक बड़े खतरे की तरह देखते हैं और हमेशा सुरक्षा के उपाय सोचते रहते हैं। जब हम धीरे-धीरे अनिश्चितता का सामना करना सीखते हैं, तो हमारा डर खत्म हो जाता है। अनिश्चितता सहनशीलता अभ्यास टूल आपको छोटे-छोटे प्रयोगों के ज़रिए मानसिक सहनशक्ति बढ़ाने का व्यावहारिक मार्ग दिखाता है।

अनिश्चितता सहने का मनोविज्ञान

जैसे व्यायाम करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, वैसे ही थोड़ा सा असमंजस सहने से दिमाग की सहनशक्ति बढ़ती है। जब हम छोटी-छोटी बातों में बिना जांच किए आगे बढ़ना सीख लेते हैं, तो बड़े से बड़ा तनाव भी हमें परेशान नहीं कर पाता।

मानसिक मजबूती के 3 छोटे प्रयोग

  1. बार-बार जांचने की आदत पहचानें: देखें कि आप किस बात की बार-बार तसल्ली करते हैं (जैसे मैसेज बार-बार चेक करना)।
  2. एक बार रुकें: आज एक बार उस आदत को रोकें और मन में उठने वाली हल्की बेचैनी को बिना कुछ किए शांत होने दें।
  3. परिणाम देखें: समझें कि बिना जांच किए भी सब कुछ सामान्य रहा और आप बिल्कुल सुरक्षित हैं।
संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

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चिंता और बार-बार तसल्ली मांगने की आदत से बचें। वैज्ञानिक मनोवैज्ञानिक प्रयोगों से अनिश्चितता में भी शांत रहना सीखें।

अनिश्चितता सहनशीलता अभ्यास: डॉ. डुगास की विधि से असमंजस सहने की आंतरिक क्षमता बढ़ाने का उपाय

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