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सामाजिक चिंता विकार: क्लार्क-वेल्स मॉडल, आत्म-केंद्रित ध्यान और सीबीटी प्रयोग

सामाजिक चिंता विकार के संज्ञानात्मक आधार, आत्म-केंद्रित ध्यान के खतरे और ध्यान पुनर्शिक्षण के 21 वैज्ञानिक पाठ।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 2 min read Updated October 23, 2026

सामाजिक चिंता विकार (Social Anxiety Disorder) सामाजिक या प्रदर्शन स्थितियों में दूसरों द्वारा जांचे जाने, उपहास का पात्र बनने या अस्वीकार किए जाने का गहरा और निरंतर भय है। डेविड क्लार्क और एड्रियन वेल्स के संज्ञानात्मक मॉडल (1995) के अनुसार, सामाजिक स्थिति में प्रवेश करते ही व्यक्ति का ध्यान दूसरों से हटकर आत्म-केंद्रित ध्यान (self-focused attention) पर आ जाता है—जहां वह अपने कांपते हाथों, पसीने या आवाज की लड़खड़ाहट की एक अतिरंजित आंतरिक छवि बना लेता है। सामाजिक चिंता विकार मनोशिक्षा मॉड्यूल 21 पाठों में इस चक्र को तोड़ने के वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करता है।

आत्म-केंद्रित ध्यान और पोस्ट-इवेंट प्रोसेसिंग

सामाजिक चिंता से ग्रस्त व्यक्ति बातचीत के दौरान यह सोचने में उलझा रहता है कि वह कैसा दिख रहा है, और बातचीत समाप्त होने के बाद घंटों तक अपनी गलतियों का मानसिक पोस्टमार्टम करता रहता है। इससे सामाजिक मेलजोल असहनीय लगने लगता है।

ध्यान का बाह्य पुनर्शिक्षण

सीबीटी में व्यक्ति को अपना ध्यान आंतरिक शारीरिक संवेदनाओं से हटाकर बाहरी बातचीत और माहौल पर लगाना सिखाया जाता है। साथ ही सेफ्टी बिहेवियर छोड़कर सीधे अनुभव प्राप्त करने का अभ्यास कराया जाता है।

संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

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सामाजिक चिंता विकार के संज्ञानात्मक आधार, आत्म-केंद्रित ध्यान के खतरे और ध्यान पुनर्शिक्षण के 21 वैज्ञानिक पाठ।

सामाजिक चिंता विकार: क्लार्क-वेल्स मॉडल, आत्म-केंद्रित ध्यान और सीबीटी प्रयोग

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