घर के नवीनीकरण अथवा नया मकान लेते समय गृहस्वामी के मन में कई व्यावहारिक प्रश्न होते हैं: *क्या छत की पानी की टंकी दक्षिण-पश्चिम में हो सकती है?*, *सीढ़ियां घड़ी की दिशा में होनी चाहिए या विपरीत?*, *दर्पण का सही स्थान कौन सा है?*, अथवा *सेप्टिक टैंक किस दिशा में होना चाहिए?* समरांगण सूत्रधार और विश्वकर्मा प्रकाश जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर तैयार किया गया क्रियास्य वास्तु प्रश्न-उत्तर लेंस 1,980 से अधिक शास्त्रीय नियमों का विश्लेषण कर किसी भी वस्तु (सीढ़ी, मंदिर, रसोई, तिजोरी, सेप्टिक टैंक आदि) के लिए तुरंत स्पष्ट निर्णय और शास्त्रीय उपाय प्रदान करता है।
प्रमुख वास्तु नियमों का त्वरित सार
- छत की पानी की टंकी: पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में अत्यंत शुभ। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में कभी न रखें, यह भारी आर्थिक तंगी लाता है।
- सेप्टिक टैंक: दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम (SSW) विसर्जन क्षेत्र में होना चाहिए। उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम में होने पर गंभीर रोग और पारिवारिक कलह होती है।
- सीढ़ियां: दक्षिण या पश्चिम में होनी चाहिए और चढ़ते समय दक्षिणावर्त (Clockwise) घूमनी चाहिए।
- दर्पण: उत्तर और पूर्व में शुभ; दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम में लगाने से बचें।
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