हथेली की मुख्य रेखाओं और पर्वतों के अतिरिक्त हस्तक्रिया और भृगु संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में विशेष सूक्ष्म रेखा-संयोजनों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें दुर्लभ लक्षण कहा जाता है। ये शुभ चिह्न पूर्व जन्मों के संचित पुण्यों, आकस्मिक धन लाभ और विशिष्ट आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक होते हैं।
हथेली के दुर्लभ चिह्न व उनका शास्त्रीय फल
| चिह्न | संस्कृत नाम | प्राकृतिक स्थान | शास्त्रीय फल |
|---|---|---|---|
| मत्स्य (मछली) | मत्स्य चिह्न | जीवन रेखा के मूल में / केतु पर्वत पर | विदेश से अपार धन, कुलीन वंश, दुर्घटनाओं से ईश्वरीय सुरक्षा |
| त्रिशूल | त्रिशूल चिह्न | शनि या सूर्य पर्वत पर भाग्य रेखा के अंत में | सर्वोच्च सत्ता, सामाजिक विजय और ईश्वरीय अनुग्रह |
| रहस्यमयी क्रॉस | गूढ़ क्रॉस (मिस्टिक क्रॉस) | हृदय और मस्तिष्क रेखा के मध्य चतुष्कोण में | छठी इंद्री, भविष्य का पूर्वाभास, गूढ़ विद्याओं और हीलिंग में निपुणता |
| कमल चिह्न | पद्म रेखा | गुरु या शुक्र पर्वत पर | वैभव के बीच भी अनासक्ति, महालक्ष्मी योग और पवित्र चरित्र |
| त्रिकोण / मंदिर | त्रिकोण / मंदिर चिह्न | गुरु पर्वत अथवा हथेली के केंद्र में | अचल संपत्ति, भूमि लाभ और बड़े संस्थानों का निर्माण |
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