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आज का राहुकाल: अपने शहर का सटीक समय, यमगंड एवं गुलिक काल कैलकुलेटर

स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर आज का सटीक राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का समय जानें। अशुभ समय से बचें और शुभ मुहूर्त में कार्य करें।

English Edition Read in Hindi
By 4 min read Updated October 21, 2026

वैदिक मुहूर्त शास्त्र में प्रत्येक दिन को खगोलीय आधार पर कई शुभ और अशुभ कालखंडों में विभाजित किया गया है। इनमें से सर्वाधिक त्याज्य और अशुभ समय राहुकाल माना जाता है। छाया ग्रह राहु के आधिपत्य वाले इस समय में किसी भी नए व्यवसाय का आरंभ, भूमि-भवन की रजिस्ट्री, वाहन की खरीद, विवाह की बातचीत या महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत करना वर्जित माना जाता है। अधिकांश लोग यह समझते हैं कि राहुकाल का समय घड़ी के अनुसार तय होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि राहुकाल का निर्धारण स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है। दिन के आठवें भाग (अष्टम भाग) के आधार पर इसका समय हर शहर में अलग-अलग होता है। क्रियास्य राहुकाल कैलकुलेटर स्थानीय अक्षांश-देशांतर के आधार पर आपके शहर के लिए राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का सटीक समय प्रस्तुत करता है।

राहुकाल निर्धारण का वैज्ञानिक एवं खगोलीय गणित

राहुकाल की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के कुल समय को 8 बराबर भागों में बांटकर की जाती है:

1. वार के अनुसार राहुकाल का अष्टम भाग

सप्ताह के सातों दिनों में राहुकाल का क्रम इस प्रकार निर्धारित रहता है:

  • सोमवार: दिन का दूसरा भाग (सुबह लगभग 7:30 से 9:00 बजे तक)।
  • मंगलवार: दिन का सातवां भाग (दोपहर बाद लगभग 3:00 से 4:30 बजे तक)।
  • बुधवार: दिन का पांचवां भाग (दोपहर लगभग 12:00 से 1:30 बजे तक)।
  • गुरुवार: दिन का छठा भाग (दोपहर लगभग 1:30 से 3:00 बजे तक)।
  • शुक्रवार: दिन का चौथा भाग (सुबह लगभग 10:30 से 12:00 बजे तक)।
  • शनिवार: दिन का तीसरा भाग (सुबह लगभग 9:00 से 10:30 बजे तक)।
  • रविवार: दिन का आठवां भाग (सायंकाल लगभग 4:30 से 6:00 बजे तक)।

2. राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल में अंतर

  • राहुकाल: नए कार्यों में धोखे, भ्रम और आर्थिक हानि का कारण बनता है।
  • यमगंड काल: मृत्यु तुल्य कष्ट, यात्रा में दुर्घटना और कार्यों के विनाश का सूचक है।
  • गुलिक काल: शनि के पुत्र मंदि का समय, जिसमें शुरू किया गया कार्य अत्यंत धीमा और कष्टदायक हो जाता है।

राहुकाल में कौन से कार्य किए जा सकते हैं?

राहुकाल केवल नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए वर्जित है। नियमित दैनिक कार्य, पहले से चल रहे व्यापारिक सौदे, भगवती दुर्गा का पूजन, भैरव उपासना और राहु शांति के मंत्र जप इस समय में विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।

सप्ताहिक अशुभ कालखंड तुलना सारणी

विभिन्न वारों में राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का समय निम्न तालिका में देखें:

वार (दिन) राहुकाल का भाग यमगंड का भाग गुलिक काल का भाग
रविवार 8वां भाग (16:30 - 18:00) 5वां भाग (12:00 - 13:30) 7वां भाग (15:00 - 16:30)
सोमवार 2रा भाग (07:30 - 09:00) 4था भाग (10:30 - 12:00) 6ठा भाग (13:30 - 15:00)
मंगलवार 7वां भाग (15:00 - 16:30) 3रा भाग (09:00 - 10:30) 5वां भाग (12:00 - 13:30)
बुधवार 5वां भाग (12:00 - 13:30) 2रा भाग (07:30 - 09:00) 4था भाग (10:30 - 12:00)
गुरुवार 6ठा भाग (13:30 - 15:00) 1ला भाग (06:00 - 07:30) 3रा भाग (09:00 - 10:30)
शुक्रवार 4था भाग (10:30 - 12:00) 7वां भाग (15:00 - 16:30) 2रा भाग (07:30 - 09:00)
शनिवार 3रा भाग (09:00 - 10:30) 6ठा भाग (13:30 - 15:00) 1ला भाग (06:00 - 07:30)

क्रियास्य राहुकाल टूल का उपयोग कैसे करें

अपने शहर का सही राहुकाल जानने की प्रक्रिया:

  • अपने वर्तमान शहर का चयन करें ताकि स्थानीय सूर्योदय व सूर्यास्त समय प्राप्त हो सके।
  • आज के दिन का सटीक राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का समय सेकंड तक देखें।
  • अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल जैसे शुभ विकल्पों की जांच कर अपने कार्यों की योजना बनाएं।

आज का सटीक राहुकाल अपने शहर के लिए देखें

क्रियास्य एस्ट्रोलॉजी पर स्थानीय सूर्योदय के आधार पर आज के राहुकाल और शुभ मुहूर्तों की सटीक लाइव रिपोर्ट प्राप्त करें।

राहुकाल समय जांचें→

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राहुकाल का समय प्रत्येक शहर में अलग क्यों होता है?

राहुकाल स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है। भौगोलिक स्थिति और ऋतुओं के अनुसार हर शहर के सूर्योदय में मिनटों का अंतर होता है, जिसके कारण राहुकाल का समय भी बदल जाता है।

यदि राहुकाल में यात्रा करनी ही पड़े तो क्या उपाय करें?

अनिवार्य परिस्थिति में घर से निकलने से पूर्व थोड़ा सा गुड़ खाकर जल ग्रहण करें, हनुमान चालीसा का पाठ करें अथवा राहु बीज मंत्र का 11 बार जप करके प्रस्थान करें।

क्या रात्रि में भी राहुकाल होता है?

नहीं, शास्त्रीय मान्यता के अनुसार राहुकाल केवल दिन के समय (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) ही प्रभावी होता है। रात्रि के अशुभ कालखंडों की गणना निशीथ काल और चौघड़िया से की जाती है।

राहुकाल और यमगंड में कौन सा अधिक हानिकारक है?

व्यापार और वित्तीय समझौतों के लिए राहुकाल अधिक हानिकारक होता है, जबकि स्वास्थ्य, शल्य चिकित्सा और दूरगामी यात्राओं के लिए यमगंड काल को अधिक त्याज्य माना जाता है।

संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

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