हमारा श्वास केवल फेफड़ों की क्रिया नहीं है, बल्कि मन और आत्मा को जोड़ने वाला दिव्य सेतु है। हठयोग प्रदीपिका के अनुसार: *'चले वाते चलं चित्तं निश्चले निश्चलं भवेत्'* — जब श्वास चंचल होता है तो मन भी अशांत रहता है; परंतु जब श्वास स्थिर हो जाता है तो मन स्वतः एकाग्र हो जाता है। प्राणायाम के माध्यम से हम शरीर की 72,000 नाड़ियों (विशेषकर इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना) को शुद्ध कर प्राण ऊर्जा का विस्तार करते हैं। क्रियास्य प्राणायाम स्टूडियो आपको नाड़ी शोधन (अनुलोम-विलोम), कपालभाति, भस्त्रिका, भ्रामरी और उज्जायी का लाइव श्वास पेसर के साथ अभ्यास कराता है।
पांच प्रमुख प्राणायाम एवं उनके लाभ
- नाड़ी शोधन (अनुलोम-विलोम): मानसिक तनाव, अवसाद और उच्च रक्तचाप को शांत करने वाला सर्वोत्तम अभ्यास।
- कपालभाति: पेट के अंगों को सक्रिय कर पाचन सुधारने और फेफड़ों को शुद्ध करने वाली क्रिया।
- भस्त्रिका: शरीर में स्फूर्ति, गर्मी और प्राण ऊर्जा का संचार करने वाला प्राणायाम।
- भ्रामरी: भौंरे की गुंजन के साथ सांस छोड़ना; अनिद्रा, क्रोध और सिरदर्द में तत्काल शांति।
- शीतली / सीत्कारी: शरीर की गर्मी और पित्त को शांत करने वाला प्राकृतिक कूलिंग प्राणायाम।
लाइव प्राणायाम पेसर के साथ अभ्यास करें
क्रियास्य प्राणायाम टूल में पूरक, कुम्भक और रेचक का समय सेट करें और आज ही श्वास साधना आरम्भ करें।
प्राणायाम पेसर खोलें→क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।
