वैदिक मुहूर्त शास्त्र में किसी भी नए और शुभ कार्य का आरम्भ करते समय अशुभ समय से बचना अत्यंत आवश्यक माना गया है। इसके लिए पंचक दोष और गौरी पंचांगम दो प्रमुख शास्त्रीय आधार हैं। जब कोई व्यक्ति गृह निर्माण, छत ढालना, विवाह, यात्रा या पूंजी निवेश की योजना बनाता है, तो पंचक के पांच दोषों (मृत्यु, अग्नि, राज, चोर, रोग) से बचना अनिवार्य है। इसी प्रकार, दक्षिण एवं उत्तर भारत में लोकप्रिय गौरी पंचांगम दिन और रात को आठ भागों में बांटकर 'अमृत', 'उद्योग', 'लाभ' और 'शुभ' जैसे स्वर्णिम समय की पहचान कराता है। क्रियास्य पंचक एवं गौरी पंचांगम कैलकुलेटर इन सूक्ष्म मुहूर्तों की सटीक गणना करता है।
पंचक के पांच प्रमुख प्रकार एवं निषेध
- रोग पंचक: इस समय में नए कार्य आरंभ करने से शारीरिक कष्ट और स्वास्थ्य बाधाएं आती हैं।
- अग्नि पंचक: गृह निर्माण, छत ढालने या मशीनरी स्थापना में अग्नि भय रहता है।
- राज पंचक: सरकारी कार्यों व अदालती मामलों में प्रतिकूल परिणाम संभव होते हैं।
- चोर पंचक: धन के लेन-देन, व्यापारिक सौदों और यात्रा में धन हानि की आशंका रहती है।
- मृत्यु पंचक: अत्यंत संवेदनशील समय; किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य हेतु वर्जित।
आज का पंचक एवं शुभ गौरी मुहूर्त जानें
क्रियास्य पंचांगम कैलकुलेटर द्वारा अपने शहर के अनुसार आज के अमृत और शुभ गौरी मुहूर्त देखें।
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