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मौसमी व द्वितीयक मूड विकार: विंटर डिप्रेशन, दवा दुष्प्रभाव और थायरॉयड की भूमिका

मौसमी अवसाद (SAD), स्टेरॉयड व अन्य दवाओं के मूड पर प्रभाव और ब्राइट लाइट थेरेपी (10,000 Lux) पर 19 संरचित पाठ।

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लेखक: Kriyasya Companion 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

मूड विकार केवल मानसिक कारणों से ही नहीं होते; कई बार वे मौसम में बदलाव (Seasonal Affective Disorder - SAD), दवाइयों के दुष्प्रभावों या शारीरिक बीमारियों (जैसे थायरॉयड विकार) के कारण उत्पन्न होते हैं। जब सर्दियों में धूप कम होती है, तो मस्तिष्क के मेलाटोनिन और सेरोटोनिन का संतुलन बिगड़ जाता है जिससे व्यक्ति को अत्यधिक नींद आना, मीठा खाने की तलब और गहरी सुस्ती महसूस होती है। इसके अलावा स्टेरॉयड दवाइयां या थायरॉयड का असंतुलन भी गंभीर अवसाद या उत्तेजना पैदा कर सकता है। मौसमी, चिकित्सीय और दवा-प्रेरित मूड विकार मनोशिक्षा मॉड्यूल 19 पाठों में शारीरिक कारणों से जुड़े मूड विकारों और ब्राइट लाइट थेरेपी का वैज्ञानिक विवरण देता है।

मौसमी अवसाद और ब्राइट लाइट थेरेपी (10,000 Lux)

सर्दियों में होने वाले अवसाद के लिए सुबह उठते ही 10,000 लक्स की विशेष लाइट बॉक्स के सामने 30 मिनट बैठना सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है, जिससे मस्तिष्क की जैविक घड़ी रीसेट हो जाती है।

शारीरिक जांच और दवाइयों के दुष्प्रभाव

अवसाद या घबराहट का इलाज शुरू करने से पहले थायरॉयड (TSH), विटामिन बी12 और विटामिन डी की जांच कराना आवश्यक है, ताकि किसी शारीरिक बीमारी को सामान्य डिप्रेशन न समझ लिया जाए।

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मौसमी अवसाद (SAD), स्टेरॉयड व अन्य दवाओं के मूड पर प्रभाव और ब्राइट लाइट थेरेपी (10,000 Lux) पर 19 संरचित पाठ।

मौसमी व द्वितीयक मूड विकार: विंटर डिप्रेशन, दवा दुष्प्रभाव और थायरॉयड की भूमिका

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