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Spirituality

चिकित्सा ऑपरेशन मुहूर्त: अशुभ दोष, भद्रा व वर्जित समय

चिकित्सा ऑपरेशन मुहूर्त में राहुकाल, भद्रा और पंचक जैसे अशुभ दोषों से कैसे बचें और दोष परिहार के शास्त्र सम्मत नियम जानिए क्रियास्य पर।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 4 min read Updated October 30, 2026

वैदिक ज्योतिष में समय केवल घड़ी की सुइयों का चलना नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा, ग्रहों की चाल और चंद्रमा की कलाओं का एक जीवंत चक्र है। हमारे ऋषियों ने शुभ मुहूर्त का विज्ञान इसलिए बनाया ताकि मनुष्य अपने हर महत्वपूर्ण कार्य को सही समय पर शुरू करके बिना बाधा के सफलता पा सके। ऑपरेशन व चिकित्सा शुभारंभ मुहूर्त: मंगल-चंद्रमा का संतुलन, त्वरित स्वास्थ्य लाभ व नियम के नियमों को समझकर जीवन में अपनाने से कार्यों में स्थायित्व, शांति और बरकत आती है।

चिकित्सा ऑपरेशन मुहूर्त का मूल ज्योतिषीय रहस्य

मुख्य ज्योतिषीय नियम: ऑपरेशन व चिकित्सा शुभारंभ मुहूर्त: मंगल-चंद्रमा का संतुलन, त्वरित स्वास्थ्य लाभ व नियम का मूल प्रभाव ऑपरेशन और नई दवा शुरू करने का वह समय जब चंद्रमा पीड़ित न हो और शरीर में रक्त का बहाव व रोग प्रतिरोधक क्षमता संतुलित रहे से जुड़ा हुआ है। जब इसे स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के पांचों अंगों की शुद्धि के साथ देखा जाता है, तो यह कार्य में आने वाली गुप्त रुकावटों को समाप्त कर दीर्घकालिक सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

हमारे प्राचीन ग्रंथ Sushruta Samhita & Muhurta Chintamani के अनुसार सही मुहूर्त में शुरू किया गया कार्य व्यक्ति के भाग्य को बल देता है और ग्रहों के नकारात्मक असर को निष्प्रभावी कर देता है। नियमों का पालन करने से मन में शांति और आत्मविश्वास बना रहता है।

प्रामाणिक संस्कृत श्लोक व सरल हिंदी भावार्थ

शस्त्रकर्मणि भौमश्च शनिहस्तस्तथैव च। न कुर्याच्चन्द्रनक्षत्रे यदंगं पीड्यते नरः॥

Sushruta Samhita & Muhurta Chintamani

सरल भावार्थ: In surgical procedures, Mars and Saturn rule the blade; let not that bodily part be operated upon when the Moon transits its governing zodiac asterism.

यह शास्त्रीय श्लोक इस बात का प्रमाण है कि सनातन परंपरा में समय की शुद्धि को कितना अनिवार्य माना गया है। सही समय पर ईश्वर का ध्यान करके काम शुरू करने से शुभ परिणाम अवश्य मिलते हैं।

पंचांग, मुहूर्त व ग्रह शुद्धि नियम तालिका

पहलु शास्त्र सम्मत नियम व्यावहारिक व ज्योतिषीय असर
स्वामी ग्रह व देवता मंगल (शल्य चिकित्सा) व चंद्रमा (रक्त व जल तत्व) / आरोग्य संतुलन समय के अनुसार सकारात्मक ऊर्जा को कार्य में स्थापित करता है
शुभ समय व नक्षत्र शल्य चिकित्सा के लिए मंगलवार व शनिवार; दवा शुरू करने के लिए अश्विनी, पुष्य, हस्त नक्षत्र कार्य को बिना रुकावट के पूरा करने में सहायक बनता है
इन दोषों से बचें पूर्णिमा और अमावस्या को सर्जरी से बचाव (रक्तस्राव का अधिक खतरा); ग्रहण काल अशुभ ग्रहों की नकारात्मक तरंगों से बचाव होता है
शुभ वार व दिशा सुबह का समय; दवा लेते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना दिशा और समय के तालमेल से सफलता जल्दी मिलती है
अनुकूल रंग व ऊर्जा शांतिदायक हरा, धवल सफेद और आरोग्य देने वाला हल्का पीला रंग वातावरण में सात्विक और शांत भाव उत्पन्न करता है
पूजा व शुभ सामग्री गंगाजल, तुलसी का जल, गाय के घी का दीपक और महामृत्युंजय यंत्र ईश्वर की कृपा और कार्य की पवित्रता बनाए रखता है
विशेष निषेध चंद्रमा जिस राशि में हो, शरीर के उस अंग का ऑपरेशन करने से शास्त्रों में मनाही है गलत समय पर शुरू करने से होने वाले नुकसान से रक्षा होती है

मुहूर्त पालन के 5 सरल व अचूक चरण

  1. स्थानीय सूर्योदय का समय देखें: अपने शहर या गांव के सटीक सूर्योदय के आधार पर ही शुभ समय और चौघड़िया की गणना करें।
  2. पंचांग शुद्धि की जांच: सुनिश्चित करें कि उस समय कोई बड़ा ग्रह दोष, भद्रा, राहुकाल या ग्रहण का साया न हो।
  3. संकल्प व पवित्रता: कार्य स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें और पूर्व या उत्तर दिशा में गाय के घी का दीपक जलाएं।
  4. ईष्ट देव का स्मरण: विघ्नहर्ता श्री गणेश और संबंधित ग्रह के मंत्र का 108 बार शांत मन से जप करें।
  5. कार्य का शुभारंभ: निर्धारित शुभ मुहूर्त के अंदर ही कार्य का पहला और मुख्य कदम उठाएं।

व्यावहारिक समझ और अंतर्मन का संतुलन

डॉक्टर पर भरोसा रखें और मन से डर निकाल दें। सकारात्मक सोच और ईश्वर का ध्यान रखने से शरीर बहुत तेजी से स्वस्थ होता है।

मुहूर्त किसी अंधविश्वास का नाम नहीं है; यह प्रकृति और समय के साथ तालमेल बिठाने की वैज्ञानिक कला है। जब आपकी नीयत साफ, मेहनत पक्की और समय अनुकूल होता है, तो ईश्वर की कृपा से हर काम सिद्ध होता है।

ज्योतिषीय सरल उपाय व दोष शांति

अस्पताल जाने से पहले महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करें और तांबे के लोटे में जल रखकर रोगी को पिलाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

पूर्णिमा के दिन बड़ा ऑपरेशन कराने से क्यों बचा जाता है?

क्योंकि पूर्णिमा पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से शरीर में रक्त और तरल पदार्थों का दबाव बढ़ जाता है, जिससे खून बहने का खतरा अधिक रहता है।

अंग विशेष के ऑपरेशन के लिए चंद्रमा की राशि का क्या नियम है?

सुश्रुत संहिता के अनुसार चंद्रमा जिस राशि में हो, उस राशि से जुड़े अंग की सर्जरी टालनी चाहिए (जैसे सिंह में हृदय, कर्क में पेट)।

नई दवा शुरू करने के लिए कौन से नक्षत्र श्रेष्ठ हैं?

अश्विनी (देवताओं के वैद्य), पुष्य और हस्त नक्षत्र में दवा शुरू करने से वह बहुत जल्दी असर दिखाती है।

भक्ति साहित्य, भजन एवं कॉपीराइट सूचना

क्रियास्य पर प्रदर्शित सभी भक्ति भजन, आरती, चालीसा एवं स्तोत्र के बोल केवल सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत भक्ति उपासना के उद्देश्य से प्रस्तुत किए गए हैं। हम सभी मूल रचनाकारों, संगीतकारों एवं कलाकारों का पूर्ण सम्मान करते हैं तथा किसी भी प्रकार के कॉपीराइट उल्लंघन को प्रोत्साहित नहीं करते हैं। यदि आप इस संगीत का आनंद लेते हैं, तो कृपया संबंधित कलाकारों का समर्थन करें और यूट्यूब म्यूजिक, स्पॉटिफाय, गाना, जियोसावन अथवा एप्पल म्यूजिक जैसे अधिकृत प्लेटफॉर्म से मूल संगीत सुनें या खरीदें। गीत के अधिकार धारक किसी भी प्रकार की आपत्ति अथवा सामग्री संबंधित समाधान के लिए [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं; हमारी टीम 48 घंटे के भीतर त्वरित समाधान सुनिश्चित करती है।

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