विवाह योग्य आयु हो जाने के उपरांत भी विवाह में लगातार विलंब होना, रिश्ते बनते-बनते टूट जाना अथवा योग्य जीवनसाथी न मिल पाना जातक और उसके परिवार के लिए अत्यंत चिंता का विषय होता है। वैदिक ज्योतिष में विवाह का कारक सप्तम भाव (विवाह भाव), सप्तमेश और कन्या की कुंडली में देवगुरु बृहस्पति तथा वर की कुंडली में शुक्र ग्रह होते हैं। इसके साथ ही जब कुंडली के लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल स्थित होकर मांगलिक दोष का निर्माण करता है, या शनि देव की वक्र दृष्टि सप्तम भाव पर पड़ती है, तो विवाह में अस्वाभाविक विलंब और अड़चनें आने लगती हैं। स्कंद पुराण और नारद संहिता में विवाह बाधा निवारण के अत्यंत सिद्ध और चमत्कारी उपाय बताए गए हैं। विवाह विलंब एवं मांगलिक दोष निवारण स्टूडियो (Marriage Delay & Manglik Dosh Studio) आपकी कुंडली के आधार पर शीघ्र विवाह और दांपत्य सुख के प्रामाणिक शास्त्रीय विधान प्रस्तुत करता है।
विवाह में आ रही बाधाओं और मांगलिक दोष का समाधान पाएं
सप्तम भाव के ग्रह दोषों की पहचान करें। मां कात्यायनी साधना, गुरुवार गुरु पूजन और प्रामाणिक कुंभ विवाह विधान से विवाह के शीघ्र योग बनाएं।
शीघ्र विवाह और मांगलिक दोष शांति के 4 प्रमुख शास्त्रीय विधान
सनातन शास्त्रों में विवाह में बाधक कर्म दोषों को शांत करने के स्पष्ट और सात्विक मार्ग दिए गए हैं:
विवाह में बाधा डालने वाले ग्रह योग और उनके सटीक उपाय
अपनी कुंडली के अनुसार विवाह में आ रहे अवरोधों की पहचान करें:
विवाह सनातन धर्म के 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संतुलन का आधार है। श्रद्धा और शास्त्रीय उपायों से ग्रह जनित समस्त बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।
अपनी कुंडली अनुसार विवाह योग व उपाय जानें
अपनी जन्म कुंडली के सप्तम भाव और मांगलिक दोष का सूक्ष्म विश्लेषण प्राप्त करें और शीघ्र विवाह के उपाय अपनाएं।
विवाह रिपोर्ट तैयार करें →क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।
