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Ayurveda & Health

मुलेठी यष्टिमधु: चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ और प्रभाव

मुलेठी यष्टिमधु के नियमित सेवन से होने वाले चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ, रोग प्रतिरोधक क्षमता और ऊर्जा वृद्धि जानिए। पढ़िए क्रियास्य पर।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 3 min read Updated October 27, 2026

चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ: पाचन तंत्र, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शरीर का कायाकल्प

विशेष आयुर्वेदिक सारांश: आयुर्वेद में मुलेठी यष्टिमधु को एक अत्यंत प्रभावशाली प्राकृतिक औषधि माना गया है, जो त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करती है। Charaka Samhita Sutrasthana & Ashtanga Hridaya के अनुसार, इसका सही मात्रा और सही समय पर सेवन करने से पाचन क्रिया मजबूत होती है और शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। गर्म पानी, शहद या दूध के साथ इसका नियमित उपयोग शरीर को नई ऊर्जा और प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है।

"यष्टिमधु गुरुः स्निग्धं मधुरं शीतलं स्मृतम्। चक्षुष्यं बलकृद्वर्ण्यं कण्ठ्यं पित्तानिलापहम्॥"
— Charaka Samhita Sutrasthana & Ashtanga Hridaya

आयुर्वेद का मूल सिद्धांत केवल बीमारी के लक्षणों को दबाना नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से स्वस्थ और मजबूत बनाना है। प्राचीन ग्रंथ Charaka Samhita Sutrasthana & Ashtanga Hridaya में मुलेठी यष्टिमधु की विशेष प्रशंसा की गई है। यह शरीर की सातों धातुओं का पोषण करता है, रक्त को शुद्ध करता है और शरीर में जमी गंदगी (आम दोष) को बाहर निकालता है। यदि इसे सही नियम और सही अनुपान के साथ लिया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित होता है।

प्रामाणिक गुण और शरीर पर प्रभाव

स्वाद में प्राकृतिक रूप से बहुत मीठी, तासीर में ठंडी, गले की खराश, आवाज बैठना और पेट के छालों को ठीक करने वाली अमृत बूटी। आयुर्वेद में किसी भी औषधि का प्रभाव उसके रस (स्वाद), गुण, वीर्य (तासीर) और विपाक पर निर्भर करता है। जब हम अपनी शारीरिक प्रकृति के अनुसार इसका सेवन करते हैं, तो यह बिना किसी दुष्प्रभाव के शरीर को प्राकृतिक संतुलन में वापस लाता है।

आयुर्वेदिक पहलूशास्त्रसम्मत नियमस्वास्थ्य पर प्रभाव और लाभ
वानस्पतिक नामGlycyrrhiza glabra (Yashtimadhu / Madhuka / Klitaka)प्रामाणिक वैज्ञानिक पहचान और प्राचीन आयुर्वेदिक नाम
प्रामाणिक ग्रंथCharaka Samhita Sutrasthana & Ashtanga Hridayaप्राचीन चिकित्सा ग्रंथ जिसमें इसके गुणों का उल्लेख है
सेवन की सही मात्रागले में खराश होने पर मुलेठी का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चूसें, या आधा चम्मच पाउडर गुनगुने पानी से लें।दैनिक खुराक और साथ में लेने वाला तरल (गर्म पानी, दूध या शहद)
प्रमुख स्वास्थ्य लाभबैठी हुई आवाज और गले की खराश ठीक करना, पेट के अल्सर और एसिडिटी में आराम, और सूखी खांसी को शांत करना।पाचन में सुधार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शरीर की सफाई
सावधानियां और परहेजहाई ब्लड प्रेशर और शरीर में बहुत ज्यादा सूजन होने पर मुलेठी का अत्यधिक सेवन करने से बचें।किन लोगों को इसका सेवन संभलकर करना चाहिए और क्या परहेज रखें

सेवन का सही समय, अनुपान और सावधानियां

आयुर्वेद में अनुपान (जिसके साथ दवा ली जाती है) का विशेष महत्व है। सही अनुपान औषधि के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। सामान्यतः इसे सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ या रात को सोने से पहले दूध के साथ लेना सबसे अच्छा माना जाता है। हमेशा ध्यान रखें कि शुरुआत में कम मात्रा से शुरू करें और शरीर की प्रतिक्रिया देखें। गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोग से पीड़ित लोगों को हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही सेवन करना चाहिए।

आहार-विहार और दैनिक जीवन के नियम

किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का पूरा लाभ तभी मिलता है जब हमारा खानपान भी सात्विक और संतुलित हो। बहुत अधिक तला-भुना, बासी या अत्यधिक तीखा भोजन करने से बचें। भोजन में ताजी हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी शामिल करें। समय पर सोना, सुबह थोड़ी देर टहलना और तनाव से दूर रहना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और मन को प्रसन्न रखता है।

मुलेठी यष्टिमधु से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

गायक और वक्ता मुलेठी क्यों चूसते हैं?

मुलेठी वोकल कॉर्ड्स (गले की नसों) को चिकनाई देती है, जिससे आवाज सुरीली, साफ और बिना किसी रुकावट के निकलती है।

पेट के अल्सर में मुलेठी कैसे मदद करती है?

यह आंतों और पेट की दीवारों पर एक सुरक्षात्मक परत बना देती है, जिससे पेट का तेजाब छालों को नहीं छू पाता और छाले जल्दी भरते हैं।

बच्चों की सूखी खांसी में मुलेठी कैसे दें?

चुटकी भर मुलेठी पाउडर को थोड़े से शहद में मिलाकर चटाने से बच्चों की खांसी में तुरंत आराम मिल जाता है।

संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

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मुलेठी यष्टिमधु के नियमित सेवन से होने वाले चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ, रोग प्रतिरोधक क्षमता और ऊर्जा वृद्धि जानिए। पढ़िए क्रियास्य पर।

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