Skip to main content
Mental Wellness

पांच क्लेश निवारण: सही समय और कितनी देर करें

पांच क्लेश निवारण के अभ्यास का सबसे शुभ समय, सही अवधि और दिनचर्या में शामिल करने के जरूरी नियम विस्तार से जानिए। पढ़िए क्रियास्य पर।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 3 min read Updated October 28, 2026

प्राचीन भारतीय ऋषि-मुनियों और आयुर्वेद के आचार्यों ने मन के स्वास्थ्य को जीवन का सबसे अमूल्य धन माना है। महर्षि पतंजलि के योग सूत्र और चरक संहिता में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक मन शांत और संतुलित नहीं होता, तब तक शरीर भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं रह सकता। हमारा मन तीन गुणों से संचालित होता है: सत्व (शांति और ज्ञान), रजस (अत्यधिक इच्छाएं और भागदौड़), तथा तमस (आलस्य और अज्ञान)। जब हम सत्व गुण को बढ़ाते हैं, तो जीवन में चिंता, घबराहट और उलझनें अपने आप समाप्त होने लगती हैं।

अभ्यास का सर्वश्रेष्ठ समय और सही अवधि: प्राकृतिक जैविक घड़ी और मानसिक एकाग्रता का मेल

वैदिक मनोविज्ञान और आधुनिक न्यूरोसाइंस के अनुसार पांच क्लेश अविद्या अस्मिता राग द्वेष अभिनिवेश मन को शांत करने और मानसिक तनाव दूर करने का बेहद प्रभावशाली साधन है। नियमित अभ्यास से अवचेतन मन की उलझनें सुलझती हैं, नर्वस सिस्टम को गहरा आराम मिलता है और आंतरिक ऊर्जा का संतुलन बनता है। यह मन की एकाग्रता बढ़ाकर जीवन में सच्चा संतोष और स्थिरता प्रदान करता है।

प्राचीन ग्रंथ Patanjali Yoga Sutras (2.3) में मन की चंचलता को शांत करने और आंतरिक संतुलन प्राप्त करने का स्पष्ट श्लोक मिलता है:

अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः क्लेशाः॥

Patanjali Yoga Sutras (2.3) — "Avidya (spiritual ignorance), Asmita (egoic identity), Raga (attachment), Dvesha (aversion), and Abhinivesha (clinging to life/fear of death) are the five Kleshas."

मन का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और अवचेतन मन की शक्ति

आज का आधुनिक विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि हमारे ज्यादातर शारीरिक रोग मन की चिंता और तनाव से शुरू होते हैं। वैदिक मनोविज्ञान में इसे 'आधि' (मानसिक रोग) और 'व्याधि' (शारीरिक रोग) कहा गया है। इंसान के सारे दुखों की जड़ पांच क्लेश हैं: अविद्या (गलत समझ), अस्मिता (अहंकार), राग (अधिक लगाव), द्वेष (नफरत या ईर्ष्या) और अभिनिवेश (मृत्यु का डर)। इन्हें पहचानकर दूर करना ही सच्ची शांति है।

मानसिक पहलूवैदिक योग का दृष्टिकोणआधुनिक विज्ञान का सचदैनिक जीवन में लाभ
तनाव नियंत्रणप्राण वायु और अपान संतुलनपैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रियदिल की धड़कन और बीपी सामान्य
भावनात्मक संतुलनचित्त प्रसादन (शांत मन)मस्तिष्क के तनाव केंद्र शांतगुस्से और चिड़चिड़ेपन पर नियंत्रण
एकाग्रता और स्मृतिधारणा और एकाग्रता अभ्यासमस्तिष्क में डोपामाइन संतुलनकाम और पढ़ाई में पूरा ध्यान
सुकून भरी नींदसंस्कार शुद्धि और मौनमस्तिष्क की तरंगें स्थिररात को बिना बेचैनी गहरी नींद

नियमित अभ्यास से होने वाले प्रत्यक्ष लाभ

यदि इस साधना और नियमों का पालन पूरी श्रद्धा के साथ किया जाए, तो कुछ ही दिनों में सकारात्मक परिणाम नजर आने लगते हैं:

  • मानसिक शांति और स्थिरता: मानसिक तनाव और दुख से स्थायी मुक्ति, किसी से नफरत या जलन न होना, चीजों के छूटने के डर का समाप्त होना और मन का हमेशा हल्का रहना।
  • तनाव से त्वरित राहत: मुश्किल परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने और बिना घबराए सही फैसला लेने की क्षमता का विकास।
  • आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि: दिनभर आलस्य और थकान से दूर रहकर ताजगी और स्फूर्ति महसूस होना।
  • रिश्तों में मधुरता: मन शांत रहने से घर-परिवार और कार्यक्षेत्र में बातचीत सौहार्दपूर्ण बनी रहती है।

दैनिक जीवन में अपनाने योग्य सरल एवं व्यावहारिक उपाय

मानसिक शांति के लिए किसी भारी-भरकम खर्च या जटिल अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती। शास्त्रों में बताए गए इन सरल घरेलू नियमों को अपनाएं:

  • दैनिक दिनचर्या: तप (अनुशासन), स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन) और ईश्वर प्रणिधान (प्रभु को समर्पण) अपनाएं। जब मन में बुरा विचार आए तो तुरंत सकारात्मक विचार लाएं।
  • प्रातःकाल का नियम: सुबह जल्दी उठें, 10 मिनट ताजी हवा में गहरी सांस लें और उगते सूर्य के दर्शन करें।
  • सात्विक खानपान: बासी, अत्यधिक तला-भुना और तीखा भोजन करने से बचें; ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन मन को प्रसन्न रखता है।
  • डिजिटल डिटॉक्स: रात को सोने से कम से कम 45 मिनट पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद कर दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: वैदिक मनोविज्ञान और मानसिक शांति

अविद्या को सारे दुखों की जड़ क्यों कहा गया है?

क्योंकि जब हम नश्वर शरीर और धन-दौलत को ही सब कुछ मान लेते हैं और आत्मा को भूल जाते हैं, तभी सारे डर और दुख पैदा होते हैं।

प्रतिपक्ष भावना से गुस्सा और नफरत कैसे शांत होती है?

जैसे ही किसी के प्रति गुस्सा या जलन आए, तुरंत उसके अच्छे गुणों को याद करें और दया का भाव लाएं, जिससे कड़वाहट मिट जाती है।

क्या आज का विज्ञान भी इन पांच क्लेशों को मानता है?

हाँ, आधुनिक मनोविज्ञान भी मानता है कि अत्यधिक मोह, अहंकार और अज्ञात का डर ही इंसान के अवसाद और तनाव का मुख्य कारण है।

संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

Share This Insight Mental Wellness

पांच क्लेश निवारण के अभ्यास का सबसे शुभ समय, सही अवधि और दिनचर्या में शामिल करने के जरूरी नियम विस्तार से जानिए।…

पांच क्लेश निवारण: सही समय और कितनी देर करें

Share to WhatsApp Post