Skip to main content
Spirituality

करवा चौथ मुहूर्त: अशुभ दोष, भद्रा व वर्जित समय

करवा चौथ मुहूर्त में राहुकाल, भद्रा और पंचक जैसे अशुभ दोषों से कैसे बचें और दोष परिहार के शास्त्र सम्मत नियम जानिए क्रियास्य पर।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 4 min read Updated October 30, 2026

वैदिक ज्योतिष में समय केवल घड़ी की सुइयों का चलना नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा, ग्रहों की चाल और चंद्रमा की कलाओं का एक जीवंत चक्र है। हमारे ऋषियों ने शुभ मुहूर्त का विज्ञान इसलिए बनाया ताकि मनुष्य अपने हर महत्वपूर्ण कार्य को सही समय पर शुरू करके बिना बाधा के सफलता पा सके। करवा चौथ पूजा व चंद्रोदय मुहूर्त: छलनी से चंद्र दर्शन, करवा फेरना और पति की लंबी उम्र के नियमों को समझकर जीवन में अपनाने से कार्यों में स्थायित्व, शांति और बरकत आती है।

करवा चौथ मुहूर्त का मूल ज्योतिषीय रहस्य

मुख्य ज्योतिषीय नियम: करवा चौथ पूजा व चंद्रोदय मुहूर्त: छलनी से चंद्र दर्शन, करवा फेरना और पति की लंबी उम्र का मूल प्रभाव कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर सुहागिनों द्वारा पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला निर्जला व्रत व चंद्र दर्शन से जुड़ा हुआ है। जब इसे स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के पांचों अंगों की शुद्धि के साथ देखा जाता है, तो यह कार्य में आने वाली गुप्त रुकावटों को समाप्त कर दीर्घकालिक सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

हमारे प्राचीन ग्रंथ Vratraj & Narada Purana के अनुसार सही मुहूर्त में शुरू किया गया कार्य व्यक्ति के भाग्य को बल देता है और ग्रहों के नकारात्मक असर को निष्प्रभावी कर देता है। नियमों का पालन करने से मन में शांति और आत्मविश्वास बना रहता है।

प्रामाणिक संस्कृत श्लोक व सरल हिंदी भावार्थ

नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं सन्ततिं शुभाम्। प्रयच्छ कान्ते देवेशि संसाराब्धिममुं तरे॥

Vratraj & Narada Purana

सरल भावार्थ: Salutations to the divine consort of Shiva; bestow auspicious marital longevity, virtuous children, and grace so that we cross the ocean of worldly existence safely.

यह शास्त्रीय श्लोक इस बात का प्रमाण है कि सनातन परंपरा में समय की शुद्धि को कितना अनिवार्य माना गया है। सही समय पर ईश्वर का ध्यान करके काम शुरू करने से शुभ परिणाम अवश्य मिलते हैं।

पंचांग, मुहूर्त व ग्रह शुद्धि नियम तालिका

पहलु शास्त्र सम्मत नियम व्यावहारिक व ज्योतिषीय असर
स्वामी ग्रह व देवता चौथ माता (पार्वती जी) व चंद्रमा / अखंड सौभाग्य और प्रेम समय के अनुसार सकारात्मक ऊर्जा को कार्य में स्थापित करता है
शुभ समय व नक्षत्र शाम के समय करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त; रात को चंद्रोदय का समय कार्य को बिना रुकावट के पूरा करने में सहायक बनता है
इन दोषों से बचें चंद्र दर्शन से पहले अन्न-जल लेना या काले-सफेद कपड़े पहनकर पूजा करना अशुभ ग्रहों की नकारात्मक तरंगों से बचाव होता है
शुभ वार व दिशा कार्तिक कृष्ण चतुर्थी; शाम को कथा सुनते समय पूर्व दिशा; रात को चंद्रमा की ओर दिशा और समय के तालमेल से सफलता जल्दी मिलती है
अनुकूल रंग व ऊर्जा सुहाग का लाल, सिंदूरी, गुलाबी और सुनहरा पीला रंग वातावरण में सात्विक और शांत भाव उत्पन्न करता है
पूजा व शुभ सामग्री मिट्टी का टोंटीदार करवा, छलनी, घी का दीपक, मीठी मठरी, सींक और जल का लोटा ईश्वर की कृपा और कार्य की पवित्रता बनाए रखता है
विशेष निषेध काले या नीले वस्त्र न पहनें; सुई-धागे या कैंची का प्रयोग करने से बचें गलत समय पर शुरू करने से होने वाले नुकसान से रक्षा होती है

मुहूर्त पालन के 5 सरल व अचूक चरण

  1. स्थानीय सूर्योदय का समय देखें: अपने शहर या गांव के सटीक सूर्योदय के आधार पर ही शुभ समय और चौघड़िया की गणना करें।
  2. पंचांग शुद्धि की जांच: सुनिश्चित करें कि उस समय कोई बड़ा ग्रह दोष, भद्रा, राहुकाल या ग्रहण का साया न हो।
  3. संकल्प व पवित्रता: कार्य स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें और पूर्व या उत्तर दिशा में गाय के घी का दीपक जलाएं।
  4. ईष्ट देव का स्मरण: विघ्नहर्ता श्री गणेश और संबंधित ग्रह के मंत्र का 108 बार शांत मन से जप करें।
  5. कार्य का शुभारंभ: निर्धारित शुभ मुहूर्त के अंदर ही कार्य का पहला और मुख्य कदम उठाएं।

व्यावहारिक समझ और अंतर्मन का संतुलन

रिश्तों में सच्चा विश्वास और आदर बनाए रखें। पति-पत्नी एक-दूसरे की ढाल बनें और हर सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलें।

मुहूर्त किसी अंधविश्वास का नाम नहीं है; यह प्रकृति और समय के साथ तालमेल बिठाने की वैज्ञानिक कला है। जब आपकी नीयत साफ, मेहनत पक्की और समय अनुकूल होता है, तो ईश्वर की कृपा से हर काम सिद्ध होता है।

ज्योतिषीय सरल उपाय व दोष शांति

शाम को करवा चौथ की कथा सुनें, सास को बायना भेंट करें और छलनी से चांद व पति का चेहरा देखकर जल ग्रहण करें।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

छलनी से चांद और पति को देखने का क्या कारण है?

छलनी से देखने पर चांद की किरणें छनकर आती हैं; इसका भाव यह है कि पत्नी अपने प्रेम और त्याग के जरिए हर बुरी नजर को छानकर केवल शुभ आशीर्वाद पति तक पहुंचाती है।

मिट्टी के करवे का क्या महत्व है?

मिट्टी का करवा पंचतत्वों का प्रतीक है; इसमें जल भरकर पूजा करने से दांपत्य जीवन में पवित्रता और शीतलता बनी रहती है।

यदि आसमान में बादल छा जाएं और चांद न दिखे तो क्या करें?

पंचांग के अनुसार चंद्रोदय के सही समय पर भगवान शिव के मस्तक के चंद्रमा का ध्यान करके पूर्व दिशा में अर्घ्य देकर व्रत खोला जा सकता है।

भक्ति साहित्य, भजन एवं कॉपीराइट सूचना

क्रियास्य पर प्रदर्शित सभी भक्ति भजन, आरती, चालीसा एवं स्तोत्र के बोल केवल सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत भक्ति उपासना के उद्देश्य से प्रस्तुत किए गए हैं। हम सभी मूल रचनाकारों, संगीतकारों एवं कलाकारों का पूर्ण सम्मान करते हैं तथा किसी भी प्रकार के कॉपीराइट उल्लंघन को प्रोत्साहित नहीं करते हैं। यदि आप इस संगीत का आनंद लेते हैं, तो कृपया संबंधित कलाकारों का समर्थन करें और यूट्यूब म्यूजिक, स्पॉटिफाय, गाना, जियोसावन अथवा एप्पल म्यूजिक जैसे अधिकृत प्लेटफॉर्म से मूल संगीत सुनें या खरीदें। गीत के अधिकार धारक किसी भी प्रकार की आपत्ति अथवा सामग्री संबंधित समाधान के लिए [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं; हमारी टीम 48 घंटे के भीतर त्वरित समाधान सुनिश्चित करती है।

Share This Insight Spirituality

करवा चौथ मुहूर्त में राहुकाल, भद्रा और पंचक जैसे अशुभ दोषों से कैसे बचें और दोष परिहार के शास्त्र सम्मत नियम जानिए…

करवा चौथ मुहूर्त: अशुभ दोष, भद्रा व वर्जित समय

Share to WhatsApp Post