जमाखोरी विकार (Hoarding Disorder) किसी वस्तु के वास्तविक मूल्य की परवाह किए बिना उसे फेंकने या अलग करने में निरंतर कठिनाई का अनुभव होना है, जिसके कारण घर के रहने योग्य कमरों में सामान का अत्यधिक अंबार लग जाता है और वे अप्रयोज्य हो जाते हैं। रैंडी फ्रॉस्ट और गेल स्टेकेटी के संज्ञानात्मक मॉडल (1996) के अनुसार, यह समस्या वस्तुओं के प्रति अत्यधिक भावनात्मक लगाव, सूचना प्रसंस्करण में कमी (सामान को वर्गीकृत न कर पाना) और भविष्य में आवश्यकता पड़ने के अवास्तविक डर से पैदा होती है। जमाखोरी विकार मनोशिक्षा मॉड्यूल 20 पाठों में जबरन सफाई के नुकसान और व्यवस्थित छंटाई तकनीकों का वैज्ञानिक मार्गदर्शन देता है।
⚖️ स्वास्थ्य व विधिक सुरक्षा अस्वीकरण
यह डिजिटल स्व-सहायता अभ्यास और मार्गदर्शिका केवल सामान्य मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यक्तिगत आत्म-जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, नैदानिक मनोवैज्ञानिक परीक्षण, मनोचिकित्सा या डॉक्टर-मरीज संबंध का विकल्प नहीं है। यदि किसी भी शारीरिक या श्वास अभ्यास से आपको बेचैनी अथवा मानसिक तनाव महसूस हो, तो तुरंत रुकें और योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
आपातकालीन संकट सहायता: यदि आप किसी तीव्र मानसिक संकट या आत्म-नुकसान के विचारों का सामना कर रहे हैं, तो कृपया तुरंत आधिकारिक आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें: टेली-मानस (Tele-MANAS) (14416 / 1800-891-4416), किरण (KIRAN) राष्ट्रीय हेल्पलाइन (1800-599-0019, 24×7), अथवा राष्ट्रीय आपातकाल नंबर (112)।
कलेक्शन और होर्डिंग में अंतर
कलेक्टर अपने सामान को व्यवस्थित रखते हैं और गर्व से दिखाते हैं, जबकि होर्डिंग में बिस्तर, रसोई और रास्ते सामान से भर जाते हैं जिससे आग लगने और संक्रमण का खतरा रहता है। यदि परिवार के लोग बिना सहमति के सामान फेंकते हैं, तो व्यक्ति को गहरा सदमा लगता है और विश्वास टूट जाता है।
निर्णय लेने का प्रशिक्षण और निस्तारण
सीबीटी में व्यक्ति को सामान को श्रेणियों (रखना, दान देना, फेंकना) में बांटने और सामान फेंकते समय होने वाली घबराहट को सहन करने का अभ्यास कराया जाता है।
