संसार में प्रत्येक व्यक्ति का स्वभाव भिन्न होता है: कोई कर्मशील होता है, किसी में भावना और प्रेम की प्रधानता होती है, तो कोई तीक्ष्ण बुद्धि और तर्क से सत्य को जानना चाहता है। सनातन धर्म ने प्रत्येक मनुष्य की स्वाभाविक प्रकृति के अनुसार आत्म-कल्याण के चार मार्ग प्रशस्त किए हैं, जिन्हें योग के चार मार्ग कहा जाता है: कर्म योग (निःस्वार्थ सेवा), भक्ति योग (समर्पण व प्रेम), ज्ञान योग (विवेक व आत्म-विचार) और राज योग (चित्त निरोध व ध्यान)। स्वामी विवेकानंद के अनुसार ये चारों मार्ग एक ही लक्ष्य तक पहुंचने वाली नदियां हैं। क्रियास्य योग मार्ग स्टूडियो आपकी स्वाभाविक प्रकृति का विश्लेषण कर आपके लिए श्रेष्ठ साधना मार्ग की पहचान कराता है।
योग के चार प्रमुख मार्ग
- कर्म योग: फल की इच्छा के बिना कर्तव्य पालन करना (निष्काम कर्म); अहंकार का नाश होता है।
- भक्ति योग: ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम, कीर्तन और प्रार्थना; हृदय के विकारों को धो डालता है।
- ज्ञान योग: 'मैं कौन हूँ?' का आत्म-विचार और सत्य-असत्य का विवेक; अज्ञान का नाश करता है।
- राज योग: मन और प्राण का निरोध कर समाधि की अवस्था प्राप्त करना।
अपना आध्यात्मिक स्वभाव और मार्ग जानें
क्रियास्य योग मार्ग टूल द्वारा अपनी आंतरिक रुचि की जांच करें और एक संतुलित साधना जीवन बनाएं।
योग मार्ग खोलें→क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।
