शिक्षा और ज्ञान अर्जन केवल परिश्रम पर ही नहीं, बल्कि जातक की स्वाभाविक मानसिक क्षमता और ग्रह योगों पर भी निर्भर करता है। वैदिक ज्योतिष में विद्या का विचार चतुर्थ भाव (प्रारंभिक शिक्षा), पंचम भाव (मेधा बुद्धि व एकाग्रता), नवम भाव (उच्च अनुसंधान व विदेशी शिक्षा) और चतुर्विंशांश (D24 कुंडली) से किया जाता है। क्रियास्य शिक्षा ज्योतिष रिपोर्ट उच्च अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं और मेधा शक्ति का संपूर्ण विश्लेषण करती है।
शिक्षा के प्रमुख ज्योतिषीय योग
कुंडली में बुध बुद्धि का स्वामी है और देवगुरु बृहस्पति उच्च ज्ञान व विवेक के अधिष्ठाता हैं। जब कुंडली में सरस्वती योग, बुध-आदित्य योग अथवा शारदा योग बनता है, तो जातक उच्च अकादमिक सम्मान और प्रतियोगी परीक्षाओं में विशिष्ट स्थान प्राप्त करता है।
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