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Spirituality

विषम स्वर दोष निवारण: घटी काल व कार्य समय नियम

विषम स्वर दोष निवारण के अनुसार नासिका परिवर्तन के सटीक घटी नियम, समयावधि और कार्य सिद्धि के मुहूर्त जानिए। पढ़िए क्रियास्य पर सरल हिंदी में।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 3 min read Updated October 30, 2026

वैदिक योग परंपरा में शिव स्वरोदय को अत्यंत गोपनीय और चमत्कारी विज्ञान माना गया है। नासिका से चलने वाला प्रत्येक श्वास केवल प्राण वायु नहीं, अपितु जीवन और भाग्य की दिशा तय करने वाला सूक्ष्म स्पंदन है। विषम स्वर दोष निवारण: २४ घंटे एक ही नथुना चलने का संकट और तुरंत नाड़ी संतुलन उपाय के नियमों को समझकर मनुष्य अपने जीवन में अद्भुत सफलता, आरोग्य और मानसिक शांति प्राप्त कर सकता है।

दैनिक प्राणिक चक्र और घटी काल मापन के शास्त्रीय नियम

स्वर योग मुख्य सार: प्रकृति के नियमानुसार प्रति ढाई घटी (लगभग एक घंटा) में श्वास का स्वर बदलता है, जो शरीर और मन को नई ऊर्जा प्रदान करता है। विषम स्वर दोष निवारण के विषय में भगवान शिव का आदेश है कि चलते हुए स्वर और पंचतत्व की पहचान कर कार्य करने वाला साधक कभी पराजित नहीं होता और उसे हर क्षेत्र में विजय मिलती है।

जब २४ घंटे तक लगातार एक ही नथुने से श्वास चलती रहे और दूसरा नथुना बंद रहे, तो इसे विषम स्वर दोष कहते हैं। यह वात, पित्त या कफ के गंभीर प्रकोप की सूचना है। बगल में दबाव देकर या रुई लगाकर इसे तुरंत ठीक करना अनिवार्य है।

प्राणिक कारक व शास्त्रीय विश्लेषण

शिव स्वरोदय शास्त्र के अनुसार इस स्वर स्थिति से जुड़े मुख्य प्राणिक व ज्योतिषीय आयाम निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं:

स्वर आयामशास्त्रीय ज्योतिषीय कारकतात्कालिक फलादेश व प्रभाव
मुख्य अधिष्ठाता नाड़ीसूर्य एवं चंद्रमा / प्राणिक संतुलनसूक्ष्म प्राण ऊर्जा का मुख्य संचालक मार्ग
शुभ संख्या स्पंदन२, ३, ५, १२शीघ्र कार्य सिद्धि और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि
सतर्कता सूचक संख्याएं१, ८धैर्य, शांत चित्त और विवेकपूर्ण निर्णय की आवश्यकता
अनुकूल दिन व दिशाएंसमस्त दिन / उत्तर एवं पूर्व दिशाशुभ परिणाम देने वाले पावन कालखंड और दिशाएं
ऊर्जावान शुभ रंगसंतुलित श्वेत, हल्का पुदीना और स्वर्णिम अंबरसकारात्मक मानसिक शांति और आभामंडल सुरक्षा

सात्विक आहार व दैनिक आचरण नियम

नाड़ियों की निर्मलता और श्वास के सूक्ष्म ज्ञान के लिए आहार-विहार का शुद्ध होना अनिवार्य है। इस काल में निम्नलिखित नियमों का पालन अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

  • हितकारी पथ्य आहार: गाय का गुनगुना दूध, मूंग दाल, अदरक की चाय, ताजा अनार और गुनगुना पानी
  • त्याज्य आचरण व अपथ्य: एक ही नथुने के चलने को नजरअंदाज करना, बहुत गरिष्ठ भोजन करना, देर रात तक जागना और तनाव लेना

तात्कालिक ग्रह शांति व स्वर उपाय

चलते हुए नथुने में रुई का फोहा लगाएं, उसी करवट १५ मिनट लेटें और शांत मन से नाड़ी शोधन प्राणायाम करें

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: २४ घंटे तक एक ही नथुने से सांस चलने को विषम (विष) स्वर क्यों कहा गया है?
उत्तर: क्योंकि इससे शरीर में गर्मी या ठंडक का भयानक असंतुलन हो जाता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है और शरीर में विषैले तत्व जमने लगते हैं।

प्रश्न: यदि लगातार २४ घंटे केवल बायां नथुना ही चलता रहे तो क्या परेशानी होती है?
उत्तर: शरीर ठंडा पड़ने लगता है, बलगम और जुकाम बढ़ता है, पाचन शक्ति मंद हो जाती है और मन में भारी उदासी व सुस्ती छा जाती है।

प्रश्न: करवट बदलकर विषम स्वर को कितनी देर में ठीक किया जा सकता है?
उत्तर: जो नथुना चल रहा हो, उसी तरफ करवट लेकर १०-१५ मिनट लेट जाने से बंद नथुना तुरंत खुल जाता है और सांस संतुलित हो जाती है।

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