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संज्ञानात्मक मनोविज्ञान: वर्किंग मेमोरी, काहनेमैन दोहरी सोच और स्मृति विज्ञान

मस्तिष्क के सूचना प्रसंस्करण का विज्ञान, एलन बैडेले का स्मृति मॉडल, डेनियल काहनेमैन की दोहरी सोच प्रणाली पर 14 पाठ।

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लेखक: Kriyasya Companion 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

संज्ञानात्मक मनोविज्ञान (Cognitive Psychology) मस्तिष्क के आंतरिक कामकाज का विज्ञान है—यह जांचता है कि हम कैसे देखते हैं, ध्यान लगाते हैं, सीखते हैं, याद रखते हैं और निर्णय लेते हैं। 1950 के दशक की 'संज्ञानात्मक क्रांति' (Cognitive Revolution) के माध्यम से उल्रिक नीसर, नोम चॉम्स्की और जॉर्ज मिलर ने इस क्षेत्र को स्थापित किया। इसमें एलन बैडेले का कार्यशील स्मृति (Working Memory) मॉडल, एंडेल तुलविंग का दीर्घकालिक स्मृति वर्गीकरण और नोबेल पुरस्कार विजेता डेनियल काहनेमैन (Daniel Kahneman) व अमोस टवरस्की का सिस्टम 1 और सिस्टम 2 सोच मॉडल शामिल है। संज्ञानात्मक मनोविज्ञान मनोशिक्षा मॉड्यूल 14 वीडियो पाठों में ध्यान के फिल्टर, स्मृति की सीमाओं, मस्तिष्क के शॉर्टकट (Heuristics) और तार्किक सोच की कला को गहराई से समझाता है।

काहनेमैन का दोहरी सोच प्रणाली: सिस्टम 1 बनाम सिस्टम 2

डेनियल काहनेमैन के अनुसार हमारा मस्तिष्क दो तरीकों से सोचता है: सिस्टम 1 (तीव्र सोच) जो स्वचालित, सहज और बिना प्रयास के निर्णय लेता है (जैसे परिचित रास्ते पर गाड़ी चलाना), लेकिन इसमें गलतियों और पूर्वाग्रहों की संभावना ज्यादा होती है; और सिस्टम 2 (धीमी सोच) जो सचेत, तार्किक और गहन विश्लेषण पर आधारित है। मानसिक परिपक्वता का अर्थ है यह जानना कि कब सिस्टम 2 को सक्रिय करना है।

स्मृति कोई वीडियो रिकॉर्डर नहीं है

संज्ञानात्मक मनोविज्ञान ने सिद्ध किया है कि स्मृति कोई स्थिर रिकॉर्डिंग नहीं है, बल्कि हर बार याद करते समय मस्तिष्क घटना का पुनर्निर्माण (Reconstruction) करता है, जिसमें नई जानकारी और भावनाएं जुड़ती रहती हैं।

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मस्तिष्क के सूचना प्रसंस्करण का विज्ञान, एलन बैडेले का स्मृति मॉडल, डेनियल काहनेमैन की दोहरी सोच प्रणाली पर 14 पाठ।

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