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हठयोग प्रदीपिका के 15 मूल आसन: बायोमैकेनिक्स, सही संरेखण एवं स्वास्थ्य लाभ

हठयोग आसन कैलकुलेटर द्वारा जानें स्वात्माराम विरचित 15 शास्त्रीय आसनों की सही विधि। पश्चिमोत्तानासन, मयूरासन और शवासन का संपूर्ण शरीर-क्रियात्मक विश्लेषण।

English Edition Read in Hindi
By 2 min read Updated October 23, 2026

15वीं शताब्दी में स्वामी स्वात्माराम द्वारा रचित हठयोग प्रदीपिका शारीरिक योग का सबसे प्रामाणिक ग्रंथ है। इस ग्रंथ के अनुसार आसनों का उद्देश्य शरीर को थकाना नहीं, बल्कि तीन सिद्धियां प्राप्त करना है: स्थैर्यम् (शरीर की स्थिरता), आरोग्यम् (रोगमुक्ति) और अंगलाघवम् (शरीर का हल्कापन)। स्वात्माराम जी ने 15 प्रमुख आसनों का वर्णन किया है — जिनमें सिद्धासन, पद्मासन, पश्चिमोत्तानासन, मयूरासन, धनुरासन और मत्स्येंद्रासन सर्वोपरि हैं। जब इन आसनों को सही संरेखण (Alignment) और श्वास के साथ किया जाता है, तो शरीर के आंतरिक अंग पुष्ट होते हैं और सभी नाड़ियां शुद्ध हो जाती हैं। क्रियास्य हठयोग स्टूडियो आधुनिक शरीर विज्ञान के साथ इन आसनों का मार्गदर्शन करता है।

प्रमुख हठयोग आसन एवं उनके प्रभाव

  • पश्चिमोत्तानासन: रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और जठराग्नि को तीव्र करता है।
  • मत्स्येंद्रासन: रीढ़ की मालिश करता है, पैंक्रियाज को सक्रिय कर डायबिटीज को नियंत्रित करता है।
  • मयूरासन: आमाशय और लिवर के समस्त विषैले तत्वों को भस्म कर प्रचंड पाचन शक्ति देता है।
  • शवासन: शरीर और मन की संपूर्ण थकान मिटाकर रक्तचाप को सामान्य करता है।

हठयोग के 15 मूल आसनों का अभ्यास करें

क्रियास्य हठयोग आसन स्टूडियो द्वारा सही विधि, जोड़ों के संरेखण और सावधानियों को समझें।

हठयोग स्टूडियो खोलें→
संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

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हठयोग आसन कैलकुलेटर द्वारा जानें स्वात्माराम विरचित 15 शास्त्रीय आसनों की सही विधि। पश्चिमोत्तानासन, मयूरासन और शवासन का संपूर्ण शरीर-क्रियात्मक विश्लेषण।

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