व्यापार में अचानक मंदी आ जाना, ग्राहकों का आना बंद हो जाना, बनते-बनते सौदे निरस्त हो जाना अथवा भारी पूंजी फंस जाना केवल बाजार के उतार-चढ़ाव का परिणाम नहीं है। वैदिक ज्योतिष में किसी भी व्यवसाय की सफलता सप्तम भाव (दुकान, साझेदारी, दैनिक ग्राहक), एकादश भाव (लाभ व आवक) और वाणिज्य के अधिपति बुध ग्रह पर निर्भर करती है। इसके अतिरिक्त व्यापारिक प्रतिष्ठान पर प्रतिस्पर्धियों की ईर्ष्या या नजर दोष (नकारात्मक ऊर्जा) के कारण भी अचानक आर्थिक घाटे होने लगते हैं। सनातन परंपरा में व्यापार वृद्धि के लिए अभिमंत्रित व्यापार वृद्धि यंत्र, गल्ले की शुद्धि और शास्त्रीय टोटकों का विधान है। व्यापार वृद्धि एवं घाटा निवारण स्टूडियो (Business Loss Reversal Studio) आपकी कुंडली और कार्यस्थल के ग्रह दोषों की पहचान करके व्यापार को पुनः लाभ की पटरी पर लाने के प्रामाणिक उपाय प्रदान करता है।
अपने व्यापार को घाटे से उबारें और ग्राहक बढ़ाएं
सप्तम व एकादश भाव के ग्रह दोष शांत करें। व्यापार वृद्धि यंत्र, गल्ले की पवित्रता और नजर दोष शांति के अचूक उपायों से व्यापार में चौतरफा उन्नति पाएं।
व्यापारिक समृद्धि और ग्राहक वृद्धि के 4 शास्त्रीय विधान
दुकान या कारखाने की ऊर्जा को शुद्ध और लाभोन्मुख बनाने के अनिवार्य नियम:
व्यापारिक समस्याओं के मूल ज्योतिषीय कारण और उपाय
अपने व्यवसाय में आ रही अड़चनों के सटीक कारणों को समझें:
व्यवसाय में ईमानदारी और धर्मपरायणता सबसे बड़ा रक्षा कवच है। ग्राहकों से छल करने से बुध ग्रह तत्काल दूषित हो जाता है, जिससे पीढ़ियों का कारोबार नष्ट हो सकता है। शुद्ध आचरण से ही लक्ष्मी का वास होता है।
अपनी व्यापारिक कुंडली का विश्लेषण करें
जन्म विवरण दर्ज करके जानें कि कौन सा ग्रह आपके व्यापार में रुकावट बन रहा है और उसका सटीक शास्त्रीय उपाय क्या है।
व्यापार रिपोर्ट प्राप्त करें →क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।
