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आयादि गणना टूल: घर व कमरों के शुभ आयाम (आयादि षड्वर्ग) निकालने की विधि

मानसार ग्रंथ के अनुसार अपने मकान, प्लॉट और कमरों के शुभ नाप की गणना करें। जानें आय, व्यय और 8 योनियों का सही गणितीय नियम।

English Edition Read in Hindi
By Kriyasya Companion 4 min read Updated October 21, 2026

वैदिक वास्तु शास्त्र में भवन या कमरों के नाप केवल लंबाई-चौड़ाई के आंकड़े नहीं होते, बल्कि वे ब्रह्मांडीय ऊर्जा के ध्वनिक अनुनादक (Acoustic Resonators) होते हैं। मानसार (अध्याय 9) और मयमतम् जैसे प्राचीन वास्तु ग्रंथों के अनुसार, जब किसी भवन या कमरे का निर्माण आयादि षड्वर्ग (Ayadi Shadvarga) के शुभ सूत्रों के अनुसार किया जाता है, तो वह स्थान सुख, समृद्धि, दीर्घायु और मानसिक शांति का केंद्र बन जाता है। इसके विपरीत यदि कमरे का नाप अधिक व्यय या अशुभ योनि पर पड़ जाए, तो व्यक्ति को अकारण आर्थिक संकट और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ता है। आयादि गणना टूल आपके भूखंड और कमरों के शुभ वैदिक माप निकालने का वैज्ञानिक साधन है।

वैदिक वास्तु आयाम गणक

आयादि षड्वर्ग से अपने घर व कमरों के शुभ नाप की गणना करें

कमरों और भूखंड के नाप को शास्त्रीय 'हस्त' में बदलें और आय, व्यय, योनि, नक्षत्र तथा वार के आधार पर श्रेष्ठ शुभ आयाम प्राप्त करें।

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आयादि षड्वर्ग के 6 प्रमुख सूत्र

षड्वर्ग का अर्थ है भवन के आयामों पर लागू होने वाले 6 शास्त्रीय गणितीय परीक्षण:

  1. आय (Aaya — धन लाभ): लंबाई पर आधारित। सूत्र: (लंबाई × 8) ÷ 12 का शेषफल। यह आने वाले धन और समृद्धि को दर्शाता है।
  2. व्यय (Vyaya — खर्च व हानि): चौड़ाई पर आधारित। सूत्र: (चौड़ाई × 9) ÷ 10 का शेषफल। यह अकारण खर्चों को दर्शाता है।
  3. योनि (Yoni — दिशा ऊर्जा): चौड़ाई पर आधारित। सूत्र: (चौड़ाई × 3) ÷ 8 का शेषफल। यह दिशात्मक शक्ति निर्धारित करता है।
  4. नक्षत्र (Nakshatra — गृह तारा): लंबाई पर आधारित। सूत्र: (लंबाई × 8) ÷ 27 का शेषफल। इसका मिलान स्वामी के जन्म नक्षत्र से किया जाता है।
  5. वार (Vaara — दिन का स्वामी): परिधि पर आधारित। सूत्र: (परिधि × 9) ÷ 7 का शेषफल। यह भवन के दिन के स्वामी ग्रह को दर्शाता है।
  6. तिथि (Tithi — चंद्र दिवस): परिधि पर आधारित। सूत्र: (परिधि × 9) ÷ 30 का शेषफल। यह पारिवारिक सुख और शांति का सूचक है।

समृद्धि हेतु आयादि के दो अनिवार्य नियम

वास्तु ग्रंथों में प्रत्येक भवन के लिए दो मूलभूत नियम अनिवार्य बताए गए हैं:

  • नियम 1: आय सदैव व्यय से अधिक होनी चाहिए (आय > व्यय): आय का शेषफल व्यय के शेषफल से बड़ा होना चाहिए। यदि आय 8 और व्यय 2 है, तो घर में निरंतर बचत और बरकत होगी। यदि व्यय बड़ा हो जाए, तो आमदनी होने पर भी धन नहीं टिकेगा।
  • नियम 2: विषम योनि का चयन: योनि का शेषफल सदैव विषम संख्या (1, 3, 5 या 7) होना चाहिए। सम संख्या वाली योनियां (धूम, श्वान, खर, काक) अनिष्टकारी मानी गई हैं।

8 योनियों का फल व प्रभाव तालिका

योनि संख्या योनि का नाम दिशा जीवन पर प्रभाव वास्तु फल
योनि 1 ध्वज (Dhwaja) पूर्व (East) यश, मान-प्रतिष्ठा, विजय, प्रशासनिक सफलता, प्रचुर धन परम शुभ
योनि 2 धूम (Dhuma) आग्नेय (SE) मानसिक भ्रम, बेचैनी, पारिवारिक कष्ट अशुभ (त्याज्य)
योनि 3 सिंह (Simha) दक्षिण (South) साहस, निर्भयता, व्यापार में विजय, नेतृत्व क्षमता परम शुभ
योनि 4 श्वान (Shvana) नैऋत्य (SW) कलह, अस्थिरता, अविश्वास, मित्रों से अलगाव अशुभ (त्याज्य)
योनि 5 वृषभ (Vrishabha) पश्चिम (West) अन्न-धन की वृद्धि, अचल संपत्ति लाभ, स्थिरता, शांति परम शुभ
योनि 6 खर (Khara / गधा) वायव्य (NW) बिना फल का कठिन परिश्रम, व्यर्थ भागदौड़ अशुभ (त्याज्य)
योनि 7 गज (Gaja / हाथी) उत्तर (North) राजसी वैभव, ऐश्वर्य, वाहन सुख, दीर्घायु परम शुभ
योनि 8 काक (Kaka / कौआ) ईशान (NE) दरिद्रता, रोग, निरंतर कटुता व शोक अशुभ (त्याज्य)

शास्त्रीय माप की इकाई: हस्त (Hasta)

वैदिक स्थापत्य में नाप 'किष्कु हस्त' में मापा जाता है:

  • 1 अंगुल = 0.75 इंच (लगभग 1.9 सेमी)
  • 1 हस्त = 24 अंगुल = 18 इंच = 1.5 फीट = 45.72 सेमी

हमारा ऑनलाइन आयादि टूल आपके द्वारा दर्ज किए गए फीट या मीटर के माप को स्वतः निकटतम पूर्ण हस्त में बदलकर सटीक शास्त्रीय गणना करता है।

कमरों और पूरे मकान के आयामों का मेल

आयादि गणना पूरे भवन की बाहरी परिधि के साथ-साथ मुख्य कमरों (मास्टर बेडरूम, ड्राइंग रूम) पर भी लागू होती है। जब दोनों स्तरों पर शुभ योनि और आय की अधिकता होती है, तो घर में संपूर्ण सुख-समृद्धि स्थापित होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बने हुए कमरे में भी आयादि दोष ठीक किया जा सकता है?

हां। कमरे में वार्डरोब, लकड़ी की दीवार या पार्टीशन लगाकर सक्रिय भीतरी लंबाई-चौड़ाई को शुभ हस्त नाप पर लाया जा सकता है।

यदि भाग देने पर शेषफल 0 बचे तो क्या माना जाता है?

आयादि गणित में शून्य शेषफल को भाजक (Divisor) ही माना जाता है (जैसे 8 से भाग देने पर शून्य आने का अर्थ 8वीं योनि काक है)।

निवास हेतु सर्वश्रेष्ठ योनि कौन सी है?

ध्वज योनि 1 (पूर्व) और गज योनि 7 (उत्तर) आवासीय भवनों के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं।

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संपादकीय एवं शैक्षणिक अस्वीकरण

क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।

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