वास्तु परामर्श का सर्वोच्च और सबसे प्रामाणिक स्तर वह है जहां भवन के नक्शे को गृहस्वामी की व्यक्तिगत जन्म कुंडली के साथ समन्वित किया जाता है — इसे एस्ट्रो-वास्तु (Astro-Vastu) कहा जाता है। एस्ट्रो-वास्तु के अनुसार आपकी कुंडली के सभी 9 ग्रह आपके घर के 16 दिशा क्षेत्रों में अपने-अपने दिशात्मक सिंहासन पर विराजमान होते हैं। इसके साथ ही, ग्रह ब्रह्मस्थान के आर-पार अपनी पराशरी और केपी दृष्टि रेखाएं डालते हैं। यदि आपकी कुंडली का कोई पीड़ित ग्रह किसी विशिष्ट दिशा पर दृष्टि डालता है, तो उस दिशा में रखा गलत सामान जीवन में भारी रुकावटें पैदा कर देता है। क्रियास्य एस्ट्रो-वास्तु 360° रिपोर्ट (R7) आपके संपूर्ण ग्रह चक्र को आपके घर के नक्शे पर स्थापित कर व्यक्तिगत समाधान प्रदान करती है।
ग्रहों के दिशात्मक सिंहासन
सूर्य (पूर्व - तेज व सम्मान), चन्द्रमा (उत्तर-पश्चिम - मानसिक गतिशीलता), मंगल (दक्षिण - पराक्रम व भूमि), बुध (उत्तर - व्यापार व बुद्धि), गुरु (उत्तर-पूर्व - ज्ञान व अध्यात्म), शुक्र (दक्षिण-पूर्व - ऐश्वर्य व कला), शनि (पश्चिम - अनुशासन व लाभ), राहु (दक्षिण-पश्चिम - आकांक्षा) और केतु (उत्तर-पूर्व - मोक्ष)। सक्रिय महादशा के स्वामी ग्रह की दिशा को शुद्ध और संतुलित रखने से तत्काल भाग्योदय होता है।
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एस्ट्रो-वास्तु रिपोर्ट खोलें→क्रियास्य पल्स पर प्रकाशित सामग्री पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय पर आधारित एक शैक्षणिक पहल है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करें।
