आजकल योग को केवल शारीरिक कसरत अथवा पसीना बहाने वाले व्यायाम तक सीमित कर दिया गया है। परंतु महर्षि पतंजलि के योग सूत्र में शारीरिक आसन योग का मात्र एक अंग है। पतंजलि ने चेतना के सर्वोच्च विकास हेतु अष्टांग योग (योग के आठ अंग) का विधान किया है। यह आठ सोपान क्रमशः हैं: यम (सामाजिक नैतिकता), नियम (आत्म-अनुशासन), आसन (स्थिर व सुखद बैठक), प्राणायाम (प्राण वायु का नियमन), प्रत्याहार (इंद्रियों का अंतर्मुख होना), धारणा (एकाग्रता), ध्यान (अखंड चिंतन) और समाधि (आत्म-साक्षात्कार)। क्रियास्य अष्टांग योग स्टूडियो इन आठों अंगों को आधुनिक जीवन में उतारने का प्रामाणिक मार्ग प्रशस्त करता है।
अष्टांग योग के आठ पावन सोपान
- यम: अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (अनावश्यक संग्रह न करना)।
- नियम: शौच (पवित्रता), संतोष, तप, स्वाध्याय (सद्ग्रंथों का पाठ) और ईश्वर प्रणिधान।
- आसन: 'स्थिरसुखमासनम्' — शरीर को स्थिर और तनावमुक्त रखना ताकि ध्यान संभव हो सके।
- प्राणायाम: श्वास-प्रश्वास की गति पर नियंत्रण कर प्राण शक्ति का विस्तार करना।
- प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि: बाहरी विषयों से मन को हटाकर परमात्मा में लीन करना।
पतंजलि के अष्टांग योग मार्ग पर चलें
क्रियास्य योग स्टूडियो द्वारा अष्टांग योग के सूत्रों, ऑडियो ध्यान और दैनिक साधना का अभ्यास करें।
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