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आज की तिथि: हिंदू चंद्र पंचांग, शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष समाप्ति समय कैलकुलेटर

आज कौन सी तिथि है? अपने शहर के अनुसार आज की तिथि, पक्ष, समाप्ति मुहूर्त, तिथि देवता और उदया तिथि के शास्त्रीय नियमों की ऑनलाइन जांच करें।

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लेखक: 4 मिनट का पाठ अपडेट: October 21, 2026

वैदिक पंचांग में समय की मौलिक इकाई सूर्य का दिन नहीं, बल्कि चंद्रमा की पावन तिथि होती है। खगोलीय दृष्टि से जब चंद्रमा सूर्य से ठीक 12 अंश (12 डिग्री) आगे बढ़ता है, तो एक तिथि का निर्माण होता है। इस प्रकार चंद्रमा के 360 अंश के भ्रमण में कुल 30 तिथियां बनती हैं, जो दो पक्षों (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) में विभाजित होती हैं। तिथि का प्रारंभ या अंत घड़ी की आधी रात (12 AM) से नहीं होता, बल्कि सूर्य और चंद्रमा के निरंतर बदलते देशांतर पर निर्भर करता है। यही कारण है कि तिथि की अवधि लगभग 19 घंटे से लेकर 26 घंटे तक हो सकती है। आज कौन सी तिथि है, वह किस समय समाप्त हो रही है, और उसका देवता कौन है—यह जानना व्रत, पूजन और शुभ कार्यों के लिए अनिवार्य है। क्रियास्य तिथि कैलकुलेटर आपके शहर के लिए आज की सटीक तिथि और समाप्ति समय प्रस्तुत करता है।

वैदिक तिथि का वैज्ञानिक एवं खगोलीय स्वरूप

वैदिक ज्योतिष में तिथियों का वर्गीकरण उनके स्वभाव और ऊर्जा के आधार पर पांच प्रमुख वर्गों (पंचक) में किया गया है:

1. दो पक्ष: शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष

  • शुक्ल पक्ष: अमावस्या के बाद जब चंद्रमा की कलाएं प्रतिदिन बढ़ती हैं। यह काल देव कार्यों, नए संकल्पों, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के विस्तार के लिए सर्वोत्तम होता है।
  • कृष्ण पक्ष: पूर्णिमा के बाद जब चंद्रमा की कलाएं घटती हैं। यह काल आत्म-मंथन, पितृ तर्पण, ध्यान और मानसिक शुद्धि के लिए उपयुक्त माना जाता है।

2. तिथियों के पांच शास्त्रीय वर्ग (नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा)

मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार 30 तिथियों को पांच स्वभावों में बांटा गया है:

  • नंदा (1, 6, 11वीं तिथि): आनंद और उत्सव की तिथि। कला, संगीत, मित्रता और नए वस्त्र धारण करने के लिए श्रेष्ठ।
  • भद्रा (2, 7, 12वीं तिथि): कल्याणकारी तिथि। व्यापार आरंभ, विद्या, वाहन क्रय और नवीन कार्यों के लिए उत्तम।
  • जया (3, 8, 13वीं तिथि): विजय प्रदायक तिथि। वाद-विवाद में विजय, प्रतियोगिता, शल्य चिकित्सा और शत्रुओं पर विजय के लिए श्रेष्ठ।
  • रिक्ता (4, 9, 14वीं तिथि): खाली तिथि। इन तिथियों में शुभ कार्यों का शुभारंभ वर्जित है; केवल ऋण मुक्ति, तांत्रिक साधना और शुद्धि कर्म किए जाते हैं।
  • पूर्णा (5, 10, 15/30वीं तिथि): परिपूर्णता की तिथि। विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक उत्सव और दीर्घकालिक योजनाओं की पूर्ति के लिए सर्वोत्तम।

उदया तिथि का शास्त्रीय नियम

हिंदू धर्म में त्योहारों और व्रतों का निर्धारण 'उदया तिथि' के आधार पर होता है। सूर्योदय के समय जो तिथि उपस्थित होती है, वह तिथि शास्त्र सम्मत रूप से संपूर्ण दिन के धार्मिक कार्यों के लिए मान्य मानी जाती है, भले ही वह दोपहर में समाप्त हो जाए।

तिथियों का पंचक वर्गीकरण एवं फल तालिका

तिथियों के पांचों वर्गों, उनके स्वामियों और अनुशंसित कार्यों का विवरण निम्न तालिका में देखें:

तिथि वर्ग शामिल तिथियां अधिष्ठाता देवता श्रेष्ठ एवं फलदायी कार्य
नंदा प्रतिपदा (1), षष्ठी (6), एकादशी (11) अग्नि देव उत्सव, संगीत, वस्त्र क्रय, आध्यात्मिक दीक्षा, आनंद।
भद्रा द्वितीया (2), सप्तमी (7), द्वादशी (12) ब्रह्मा / सूर्य व्यापारिक लेनदेन, गृह प्रवेश, विद्यारंभ, यात्रा।
जया तृतीया (3), अष्टमी (8), त्रयोदशी (13) मां गौरी / शिव मुकदमों में विजय, प्रतियोगी परीक्षाएं, सैन्य कर्म, रोग निवारण।
रिक्ता चतुर्थी (4), नवमी (9), चतुर्दशी (14) गणेश / दुर्गा / शिव ऋण चुकाना, नकारात्मकता नाश; नए मांगलिक कार्यों से बचें।
पूर्णा पंचमी (5), दशमी (10), पूर्णिमा (15) श्रीहरि विष्णु / चंद्र विवाह, शांति पाठ, बड़े व्यापारिक अनुष्ठान, संपूर्ण कार्य सिद्धि।

क्रियास्य तिथि टूल का उपयोग कैसे करें

आज की सही तिथि जानने की सरल विधि:

  • अपने शहर का चयन करें जिससे स्थानीय सूर्य और चंद्रमा की कोणीय स्थिति की गणना हो सके।
  • वर्तमान समय में सक्रिय तिथि, पक्ष (शुक्ल/कृष्ण) और तिथि का नाम देखें।
  • तिथि की ठीक समाप्ति समय (घंटे और मिनट तक) की जानकारी प्राप्त करें।
  • उदया तिथि के नियम के अनुसार व्रत एवं पूजा के सही दिन की पुष्टि करें।

आज की तिथि एवं पक्ष की संपूर्ण जानकारी देखें

क्रियास्य एस्ट्रोलॉजी पर आज की तिथि, पक्ष, समाप्ति मुहूर्त और तिथि देवता की लाइव खगोलीय गणना प्राप्त करें।

लाइव तिथि कैलकुलेटर खोलें→

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्षय तिथि और वृद्धि तिथि क्या होती है?

जब कोई तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है (यानी किसी भी सूर्योदय को स्पर्श नहीं करती), तो उसे 'क्षय तिथि' कहते हैं। वहीं जब कोई तिथि दो लगातार सूर्योदयों को स्पर्श करती है, तो उसे 'वृद्धि तिथि' कहा जाता है।

रिक्ता तिथियों (4, 9, 14) में शुभ कार्य क्यों वर्जित हैं?

संस्कृत में 'रिक्त' का अर्थ खाली होता है। शास्त्रीय मान्यता है कि इन तिथियों में शुरू किए गए कार्यों में पूंजी और ऊर्जा का क्षय होता है। हालांकि तंत्र साधना, गणेश पूजन और ऋण मुक्ति के लिए ये तिथियां अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती हैं।

शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की तिथियों में क्या अंतर होता है?

शुक्ल पक्ष की तिथियों में चंद्रमा का प्रकाश और आकर्षण बढ़ता है जो सकारात्मक ऊर्जा और भौतिक प्रगति के अनुकूल होता है। कृष्ण पक्ष में चंद्रमा की कलाएं घटती हैं जो आत्म-संयम, ध्यान और आध्यात्मिक उत्थान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

उपवास के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि कौन सी मानी गई है?

सनातन परंपरा में एकादशी (11वीं तिथि) को सभी व्रतों में शिरोमणि माना गया है। यह तिथि शारीरिक विषहरण (डिटॉक्स) और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

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