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Faith & Devotion

गणेश जी आरती ऋद्धि सिद्धि: ग्रह शांति व दोष निवारण उपाय

गणेश जी आरती ऋद्धि सिद्धि के पाठ से कुंडली के अशुभ ग्रह, साढ़ेसाती, कालसर्प या मांगलिक दोष शांत करने के अचूक उपाय जानिए। पढ़िए क्रियास्य पर।

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लेखक: Kriyasya Companion 3 मिनट का पाठ अपडेट: October 28, 2026

सनातन धर्म और वैदिक परंपरा में गणेश जी की आरती: ऋद्धि-सिद्धि का वास और मंगल कार्य प्रारंभ को अत्यंत कल्याणकारी, संकट मोचन और आत्मिक शांति देने वाला माना गया है। शास्त्रों का स्पष्ट कथन है कि जब कोई व्यक्ति श्रद्धा, नियम और सही विधि से भगवान की पूजा और मंत्र का जप करता है, तो उसके जीवन के बड़े से बड़े कष्ट, भय और ग्रह दोष समाप्त हो जाते हैं।

ग्रह शांति और कर्म शुद्धि: कुंडली के भारी दोषों, शनि की साढ़ेसाती और राहु-केतु के कष्टों से मुक्ति के उपाय

गणेश जी की आरती हर शुभ कार्य का शुभारंभ है। 'जय गणेश देवा' की पावन ध्वनि घर में ऋद्धि-सिद्धि (बुद्धि और धन) का वास कराती है और परिवार के सभी कष्टों को हर लेती है। हमारे पूज्य ग्रंथ Skanda Purana & Traditional Ganesha Aarti (Jai Ganesh Deva) में इस पावन पाठ का विस्तार से वर्णन मिलता है, जो मन और आत्मा को नई ऊर्जा से भर देता है।

पूजा का मुख्य पहलूशास्त्र सम्मत नियमदैनिक जीवन में लाभ
मुख्य देवता व ऊर्जाप्रथम पूज्य श्री गणेश जी, ऋद्धि और सिद्धि संग, समस्त शुभ कार्यों के निर्विघ्न शुभारंभ के स्वामीजीवन में साहस, विजय और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पावन ग्रंथ व आधारSkanda Purana & Traditional Ganesha Aarti (Jai Ganesh Deva)वाणी में मधुरता और चित्त में एकाग्रता बढ़ती है।
पूजा का सही समयकिसी भी पूजा या शुभ कार्य की शुरुआत में, सुबह और शाम की दैनिक आरती के समयपूजा का सौ गुना अधिक पुण्य और फल प्राप्त होता है।
प्रिय भोग व पुष्पगाय के घी का दीपक, मोदक, बेसन या मोतीचूर के लड्डू, 21 दूर्वा, सिंदूर और लाल गुड़हल का फूलघर के मंदिर में पवित्रता और देवी-देवताओं का वास होता है।
भूलकर भी न करेंबिना गणेश वंदना के कोई भी पूजा शुरू करना, गणेश जी को तुलसी चढ़ाना, और बासी मुरझाए फूल चढ़ानापूजा के खंडित होने और दोष लगने से बचाव होता है।

प्रामाणिक वैदिक मंत्र एवं सरल हिंदी अर्थ

शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी मंत्र का जप करते समय उसका अर्थ समझना जरूरी है। Skanda Purana & Traditional Ganesha Aarti (Jai Ganesh Deva) का यह पावन श्लोक विशेष फलदायी है:

॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी। माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥ ॥

सरल हिंदी अर्थ: "Hail Lord Ganesha, Hail Lord Ganesha, Hail Lord Ganesha; whose mother is Goddess Parvati and father is Lord Mahadeva; with one tusk, full of compassion, four arms, adorned with a tilak on His forehead, riding His mouse."

दैनिक पूजा की सरल चरणबद्ध विधि और जरूरी नियम

गणेश जी को 21 दूर्वा और मोदक अर्पित करें, सिंदूर का तिलक लगाएं, परिवार सहित ताली बजाते हुए आरती गाएं और मोदक का प्रसाद बांटें।

  • स्नान और शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ-सुथरे हल्के वस्त्र पहनें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
  • दीपक और धूप: घर के मंदिर में गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं और सुगंधित धूपबत्ती सुलगाएं।
  • संकल्प और ध्यान: हाथ में थोड़ा सा जल और पुष्प लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करें, फिर जल को प्रभु के चरणों में अर्पित कर दें।
  • आरती और क्षमा प्रार्थना: पाठ पूरा होने के बाद प्रेमपूर्वक आरती करें और अंत में अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें।

शास्त्रोक्त फलश्रुति: नियमित पाठ के चमत्कारी लाभ

जो श्रद्धालु नियमित रूप से इस विधि का पालन करते हैं, उन्हें ये दिव्य परिणाम मिलते हैं: संतान को विद्या और बुद्धि की प्राप्ति, नए मकान या दुकान में बरकत, रुके हुए मांगलिक कार्यों का संपन्न होना और दरिद्रता का नाश।

पूजा और पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

किसी भी पूजा या मांगलिक कार्य में सबसे पहले गणेश जी की ही पूजा क्यों की जाती है?

भगवान शिव ने गणेश जी को 'प्रथम पूज्य' का वरदान दिया था; उनकी पूजा किए बिना कोई भी पूजा, यज्ञ या नया काम सफल नहीं माना जाता।

गणेश जी के साथ ऋद्धि और सिद्धि की पूजा का क्या फल मिलता है?

ऋद्धि घर में धन, संपदा और बरकत लाती हैं, जबकि सिद्धि बुद्धि, ज्ञान और सफलता देती हैं; दोनों के बिना जीवन अधूरा रहता है।

गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने से क्या चमत्कारी लाभ होता है?

गणेश जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है; सिंदूर चढ़ाने से कुंडली के मंगल और राहु के दोष शांत होते हैं और भय से मुक्ति मिलती है।

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गणेश जी आरती ऋद्धि सिद्धि के पाठ से कुंडली के अशुभ ग्रह, साढ़ेसाती, कालसर्प या मांगलिक दोष शांत करने के अचूक उपाय…

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