क्लिनिशियन ऑनबोर्डिंग और रेफरल वर्कफ़्लो (Clinician Onboarding and Referral Workflow) डॉक्टरों, मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के लिए वह व्यावहारिक मार्गदर्शिका है जो बताती है कि थेरेपी के दौरान डिजिटल मनोशिक्षा का वैज्ञानिक उपयोग कैसे किया जाए। मरीज को केवल वीडियो देखने के लिए कह देना कोई खानापूर्ति नहीं है, बल्कि यह दो सत्रों के बीच मरीज की समझ और जागरूकता को मजबूत करने का शक्तिशाली तरीका है। इस ढांचे के तहत डॉक्टर मरीज की उम्र, बीमारी के चरण और जरूरत के अनुसार सही वीडियो चुनते हैं, मरीज के साथ संवेदनशील संवाद करते हैं ताकि उसे उपेक्षित महसूस न हो, और अगले सत्र में उस सीख की समीक्षा करते हैं। क्लिनिशियन ऑनबोर्डिंग और रेफरल वर्कफ़्लो मॉड्यूल 10 वीडियो पाठों में डिजिटल रेफरल कोड बनाने, मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज करने, मरीज की असहमति को संभालने और आपातकालीन स्थितियों में वीडियो न देने के सख्त नियमों की व्याख्या करता है।
⚖️ स्वास्थ्य व विधिक सुरक्षा अस्वीकरण
यह डिजिटल स्व-सहायता अभ्यास और मार्गदर्शिका केवल सामान्य मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यक्तिगत आत्म-जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, नैदानिक मनोवैज्ञानिक परीक्षण, मनोचिकित्सा या डॉक्टर-मरीज संबंध का विकल्प नहीं है। यदि किसी भी शारीरिक या श्वास अभ्यास से आपको बेचैनी अथवा मानसिक तनाव महसूस हो, तो तुरंत रुकें और योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
आपातकालीन संकट सहायता: यदि आप किसी तीव्र मानसिक संकट या आत्म-नुकसान के विचारों का सामना कर रहे हैं, तो कृपया तुरंत आधिकारिक आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें: टेली-मानस (Tele-MANAS) (14416 / 1800-891-4416), किरण (KIRAN) राष्ट्रीय हेल्पलाइन (1800-599-0019, 24×7), अथवा राष्ट्रीय आपातकाल नंबर (112)।
कब डिजिटल वीडियो न दें (Contraindications)
यदि कोई मरीज अत्यधिक तीव्र अवसाद, सक्रिय आत्महत्या के विचार, अत्यधिक उन्माद (Mania) या भ्रम की स्थिति में हो, तो उसे वीडियो देखने की सलाह कभी नहीं दी जाती। ऐसी स्थिति में तत्काल अस्पताल में भर्ती और डॉक्टर की प्रत्यक्ष देखरेख ही एकमात्र सही कदम है।
सत्र में सीख का एकीकरण
एक अच्छा थेरेपिस्ट अगले सत्र के पहले 10 मिनट यह जानने में लगाता है कि मरीज ने वीडियो से क्या सीखा, उसे कौन सी बात कठिन लगी और वह इसे अपने दैनिक जीवन में कैसे लागू करेगा।
