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व्यवहारिक व्यसन: जुआ, गेमिंग विकार, डोपामाइन चक्र और सीबीटी नियंत्रण

जुआ और गेमिंग की लत के न्यूरोलॉजिकल आधार, 'नियर-मिस' के संज्ञानात्मक भ्रम और डिजिटल सीमाओं के निर्माण पर 22 पाठ।

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लेखक: Kriyasya Companion 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

व्यवहारिक व्यसन (Behavioural Addictions / बिना नशे की लत) उन बाध्यकारी क्रियाओं को संदर्भित करते हैं जो बिना किसी रासायनिक पदार्थ के भी मस्तिष्क के डोपामाइन रिवॉर्ड सिस्टम को ठीक उसी तरह हाईजैक कर लेते हैं जैसे शराब या ड्रग्स। विश्व स्वास्थ्य संगठन (ICD-11) ने जुआ विकार (Gambling Disorder) और गेमिंग विकार (Gaming Disorder) को आधिकारिक मानसिक बीमारी का दर्जा दिया है। यह बी. एफ. स्किनर के वेरिएबल-रेशियो सुदृढ़ीकरण (Variable-ratio reinforcement) सिद्धांत पर काम करता है, जहां अप्रत्याशित इनाम मिलने की उम्मीद में मस्तिष्क डोपामाइन की भारी बाढ़ उत्पन्न करता है। व्यवहारिक व्यसन और बाध्यकारी व्यवहार मनोशिक्षा मॉड्यूल 22 पाठों में 'नियर-मिस' भ्रम, डिजिटल फ्रिक्शन और जुए व गेमिंग की लत से मुक्ति का वैज्ञानिक प्रशिक्षण देता है।

'नियर-मिस' (Near-Miss) का खतरनाक भ्रम

जुए या गेम में जब व्यक्ति जीतते-जीतते जरा सा चूक जाता है, तो मस्तिष्क सोचता है कि "मैं बस जीतने ही वाला था, अगली बार पक्का जीतूंगा।" यह भ्रम व्यक्ति को सब कुछ हारने तक खेलने पर मजबूर कर देता है। मशीनों की रंगीन लाइटें और आवाजें दिमाग को यह महसूस कराती हैं कि वह नुकसान में भी कुछ जीत रहा है।

डिजिटल बाधाएं और व्यवहारिक सुधार

सीबीटी थेरेपी में जुए के भ्रम को तोड़ा जाता है और वातावरण में रुकावटें (जैसे गेमिंग ऐप्स हटाना, बैंक कार्ड पर जुए के लेन-देन को ब्लॉक करना) लगाई जाती हैं ताकि आवेग आने पर व्यक्ति तुरंत न खेल सके।

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जुआ और गेमिंग की लत के न्यूरोलॉजिकल आधार, 'नियर-मिस' के संज्ञानात्मक भ्रम और डिजिटल सीमाओं के निर्माण पर 22 पाठ।

व्यवहारिक व्यसन: जुआ, गेमिंग विकार, डोपामाइन चक्र और सीबीटी नियंत्रण

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