पारम्परिक 8 दिशाओं का मॉडल आधुनिक फ्लैटों और तिरछे भूखंडों की सूक्ष्म वास्तु समस्याओं को समझने के लिए पर्याप्त नहीं है। प्रामाणिक वास्तु शास्त्र ब्रह्मस्थान से निकलने वाले 16 दिशा क्षेत्रों (प्रत्येक जोन 22.5°) पर कार्य करता है। जब किसी अनियमित नक्शे के कारण कोई जोन कट जाता है अथवा अत्यधिक बढ़ जाता है, तो उस दिशा से जुड़े जीवन के पहलू पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, उत्तर-उत्तर-पूर्व (NNE) का कटना शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटाता है, जबकि दक्षिण-पूर्व (SE) का कटना आर्थिक तरलता को समाप्त कर देता है। क्रियास्य 16-जोन वास्तु लेंस आपके प्रत्येक क्षेत्र के क्षेत्रफल की गणना कर कटे व बढ़े हुए क्षेत्रों की सटीक पहचान करता है।
16 दिशाएं एवं उनके प्रभाव
उत्तर (धन व अवसर), उत्तर-उत्तर-पूर्व (स्वास्थ्य व रोगमुक्ति), उत्तर-पूर्व (मानसिक स्पष्टता), पूर्व-उत्तर-पूर्व (आनंद व मनोरंजन), पूर्व (सामाजिक संबंध), पूर्व-दक्षिण-पूर्व (मंथन), दक्षिण-पूर्व (नकद धन व अग्नि), दक्षिण-दक्षिण-पूर्व (शक्ति व आत्मविश्वास), दक्षिण (विश्राम व ख्याति), दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम (विसर्जन), दक्षिण-पश्चिम (संबंध व स्थिरता), पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम (विद्या व बचत), पश्चिम (लाभ), पश्चिम-उत्तर-पश्चिम (अवसाद मुक्ति), उत्तर-पश्चिम (सहायता व बैंक ऋण) और उत्तर-उत्तर-पश्चिम (आकर्षण)।
अपने 16 जोन्स का वैज्ञानिक संतुलन देखें
क्रियास्य 16-जोन लेंस द्वारा अपने नक्शे का बार चार्ट देखें और कटे हुए क्षेत्रों का बिना तोड़फोड़ उपचार करें।
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