कुंडली का सप्तम भाव (कलत्र भाव), पुरुषों हेतु शुक्र एवं स्त्रियों हेतु देवगुरु बृहस्पति वैवाहिक सुख के कारक हैं। विवाह में विलंब या दांपत्य जीवन में तनाव होने पर गुरुवार को चुटकी भर हल्दी डालकर स्नान, गौरी-शंकर रुद्राक्ष, भगवान शिव-पार्वती की युगल पूजा एवं शुक्रवार को शक्कर या खीर का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।
ज्ञान, पढ़ाई, बुद्धि, विवाह, संतान, समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और मार्गदर्शन वाले काम।
हिम्मत, ऊर्जा, कार्यशक्ति, महत्वाकांक्षा और विरोध पर विजय।
आकर्षण, विवाह योग्य साथी की खोज, धन सहयोग, अच्छी नींद और मानसिक आराम।
वैवाहिक शांति, विदेश संबंध, मन की शांति, हिम्मत और पवित्रता।
प्रेम, सुंदरता, सुख-सुविधा, रचनात्मकता, आकर्षण और वैवाहिक सुख।
लाभ, समृद्धि, व्यापार स्थिरता और शुभ-लाभ ऊर्जा के लिए।
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यह उपाय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical), कानूनी (Legal), मनोवैज्ञानिक या वित्तीय (Financial) सलाह का विकल्प नहीं हैं। शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता, कानूनी विवाद अथवा वित्तीय संकट में सदैव लाइसेंस प्राप्त योग्य पेशेवर से परामर्श लें।
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