शनि देव न्याय, कर्म और अनुशासन के अधिपति हैं। साढ़े साती या ढैया काल में मनुष्य को घबराने के बजाय अपने कर्मों में शुद्धि, अहंकार का त्याग, असहायों की सेवा, शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक और छाया दान करना चाहिए।
शनिवार प्रातः एक कांसे या लोहे की कटोरी में शुद्ध सरसों का तेल भरें। उसमें अपने मुख की छाया (प्रतिबिंब) देखें और शनि देव से जाने-अनजाने हुए अपराधों की क्षमा मांगें। तत्पश्चात यह तेल पात्र किसी जरूरतमंद या शनि मंदिर में दान करें। इसे छाया दान कहते हैं।
चिमटा, अंगीठी, तवा या ऐसे उपयोगी लोहे के सामान दान करें।
दसवें शनि के कमजोर होने पर गुरु को दान, बुजुर्ग सम्मान या केसर/चना संबंधी उपाय से सहारा दें।
कुंडली पुष्टि के बाद बुजुर्ग सम्मान, पीला दान या धार्मिक अनुशासन जैसे गुरु उपाय करें।
जब exalted Saturn हो तो शराब, मांस, अंडा, तेल, लोहा दान न करें; स्रोत इसे सहायक ग्रह को कमजोर करना मानता है।
Saturn 1st with Jupiter 5th में पहले शनि और पाँचवें गुरु में ताँबे का दान न करें क्योंकि ताँबे का दान संतान सुख के लिए हानिकारक माना गया है।
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